क्रिकेटर राजेश चौहान पर गिरी गाज, ₹17.52 लाख की धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज करने के कोर्ट ने दिए आदेश
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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क्रिकेटर राजेश चौहान पर गिरी गाज, ₹17.52 लाख की धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज करने के कोर्ट ने दिए आदेश
भिलाई/दुर्ग: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर राजेश चौहान एक बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गए हैं। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक अदालत ने पूर्व क्रिकेटर के खिलाफ ₹17.52 लाख की कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का सख्त निर्देश जारी किया है। उन पर एक ठेकेदार को भारी-भरकम मुनाफा कमाने और जिंदल इस्पात लिमिटेड (JSP) में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए ऐंठने का आरोप है।
📌 मुख्य बिंदु: पूरा मामला एक नजर में
आरोपी: राजेश चौहान (पूर्व भारतीय क्रिकेटर) और उनका साथी निकेश झा।पीड़ित: उपेन्द्र सिंह (निवासी: सुपेला, भिलाई; पेशे से ठेकेदार)।कुल ठगी की राशि: ₹17,52,500 (सत्रह लाख बावन हजार पांच सौ रुपए)।झांसा: जिंदल स्टील में ट्रांसपोर्टिंग का ठेका दिलाना और व्यवसाय में 50% का पार्टनर बनाना।न्यायिक आदेश: दुर्ग कोर्ट के जेएमएफसी (JMFC) मजिस्ट्रेट ने सुपेला थाना पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
💼 कैसे बुना गया धोखाधड़ी का जाल
पीड़ित ठेकेदार उपेन्द्र सिंह द्वारा कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम साल 2021 से शुरू हुआ था:क्रिकेटर के रसूख का इस्तेमाल: उपेन्द्र सिंह की मुलाकात निकेश झा के जरिए पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान से हुई थी। चौहान ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के रसूख और रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी पुरानी ऊंची साख का हवाला देकर ठेकेदार का भरोसा जीता।जिंदल स्टील में काम का वादा: राजेश चौहान और निकेश ने उपेन्द्र को झांसा दिया कि उनकी जिंदल इस्पात लिमिटेड (JSP) में गहरी पैठ है और वे वहां ट्रांसपोर्टिंग का बड़ा काम दिला सकते हैं।
पार्टनरशिप और पैसों की मांग: आरोपियों ने उपेन्द्र को अपनी फर्म ‘आरएन इंटरप्राइजेज’ में 50% का पार्टनर बनाने का वादा किया। काम शुरू करने और सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल ₹17.52 लाख ले लिए। यह राशि बकायदा बैंक ट्रांसफर और चेक के माध्यम से दी गई थी।
🚨 वादे से मुकरे, चेक भी हुए बाउंस
पैसे लेने के बाद जब महीनों बीत गए और कोई काम नहीं मिला, तो उपेन्द्र सिंह ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए।फर्जी वर्क ऑर्डर का शक: पीड़ित को लगातार टालमटोल भरा जवाब मिलता रहा। जब उसने दबाव बनाया, तो आरोपियों ने पैसे लौटाने के एवज में कुछ चेक दिए।चेक बाउंस और धमकी: उपेन्द्र ने जब उन चेकों को बैंक में लगाया, तो वे खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद जब पीड़ित ने सीधे संपर्क किया, तो आरोपियों ने पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया और उन्हें कथित तौर पर जान से मारने की धमकी भी दी।
⚖️ पुलिस ने नहीं सुनी, तो कोर्ट ने संभाला मोर्चा
पीड़ित उपेन्द्र सिंह ने सबसे पहले इस धोखाधड़ी की शिकायत सुपेला थाने और दुर्ग पुलिस अधीक्षक (SP) से की थी। पुलिस स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने पर, पीड़ित ने अपने वकील के माध्यम से दुर्ग न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और धारा 156(3) के तहत आवेदन लगाया।मामले की गंभीरता, बैंक ट्रांजैक्शन के सबूतों और चेक बाउंस के दस्तावेजों को देखने के बाद, न्यायालय ने सुपेला पुलिस को फटकार लगाते हुए पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान और उनके साथी निकेश झा के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है।इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से छत्तीसगढ़ के खेल और व्यापारिक जगत में हड़कंप मच गया है।





