डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़): रेलवे की लापरवाही ने ली तीन मासूमों की जान, बारिश के पानी से भरे 6 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से मौत

 डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़): रेलवे की लापरवाही ने ली तीन मासूमों की जान, बारिश के पानी से भरे 6 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से मौत

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

*******************************

 

 

 

डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़): रेलवे की लापरवाही ने ली तीन मासूमों की जान, बारिश के पानी से भरे 6 फीट गहरे गड्ढे में डूबने से मौत

 

 

 

 

डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ बोरतालाव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आश्रित ग्राम गांधीनगर में बुधवार शाम को बारिश के पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान सार्थक कोकोटे, कृष मण्डावी (08) और दानेश मण्डावी (06) के रूप में हुई है।

यह गड्ढा रेलवे निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी निकालने के बाद ठेकेदार द्वारा बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुला छोड़ दिया गया था, जो हालिया बारिश के बाद पानी से लबालब भर गया था।

तालाब जैसा दिख रहा था 6 फीट गहरा गड्ढा

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई-हावड़ा मेन लाइन पर पानियाजोब और बोरतलाव रेलवे स्टेशन के बीच नया ट्रैक और सुरंग बनाने का काम चल रहा है। इस निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार ने स्थानीय किसान भीशू उइके के निजी खेत से मिट्टी और मुरुम निकाली थी। खुदाई पूरी होने के बाद करीब 6 फीट गहरे इस गड्ढे को पाटने या उसकी घेराबंदी करने के बजाय ऐसे ही खुला छोड़ दिया गया।

लगातार हो रही बारिश के कारण यह गड्ढा पानी से भर गया और बाहर से किसी सामान्य तालाब जैसा दिखने लगा। बुधवार शाम को घर के पास खेलते-खेलते तीनों बच्चे इसमें नहाने के लिए उतर गए। गहराई का अंदाजा न होने के कारण तीनों मासूम पानी में समा गए।

शिक्षकों की हड़ताल के चलते घर पर थे बच्चे

इस हादसे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में स्कूल के शिक्षक ही इन बच्चों को घर से सुरक्षित स्कूल ले जाते थे और वापस छोड़ते थे। लेकिन शिक्षकों की हड़ताल होने की वजह से बुधवार को बच्चों के स्कूल आने-जाने की नियमित व्यवस्था पूरी तरह ठप थी। स्कूल बंद होने के कारण बच्चे घर पर ही थे और शाम को खेलते वक्त हादसे का शिकार हो गए। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि हादसे का हड़ताल से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक जांच की जा रही है।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

हादसे के बाद ग्रामीणों ने सीधे तौर पर रेलवे की निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी खुदाई की गई थी, तो वहाँ अनिवार्य रूप से बैरिकेडिंग की जानी चाहिए थी या कम से कम चेतावनी बोर्ड लगाया जाना चाहिए था। सुरक्षा मानकों की इस घोर अनदेखी के कारण ही तीन घरों के चिराग बुझ गए।घटना के बाद ग्रामीणों ने खुद ही बच्चों के शवों को पानी से बाहर निकाला।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निर्देश

सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची बोरतालाव थाना पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए डोंगरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हादसे के हर पहलू को खंगाला जा रहा है। यदि जांच में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी या ठेकेदार की लापरवाही प्रमाणित होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।