अबूझमाड़ से मुंबई-नागपुर की राह होगी आसान: कोंडागांव-गढ़चिरौली स्टेट हाईवे बना राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130D, ₹973 करोड़ की लागत से 9 चरणों में शुरू हुआ काम

 अबूझमाड़ से मुंबई-नागपुर की राह होगी आसान: कोंडागांव-गढ़चिरौली स्टेट हाईवे बना राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130D, ₹973 करोड़ की लागत से 9 चरणों में शुरू हुआ काम

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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अबूझमाड़ से मुंबई-नागपुर की राह होगी आसान: कोंडागांव-गढ़चिरौली स्टेट हाईवे बना राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130D, ₹973 करोड़ की लागत से 9 चरणों में शुरू हुआ काम

रायपुर/कोंडागांव: बस्तर और धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने छत्तीसगढ़ के कोंडागांव-नारायणपुर-गढ़चिरौली स्टेट हाईवे को अब नेशनल हाईवे 130डी (NH-130D) का दर्जा दे दिया है। इस बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण 973 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से किया जा रहा है।इस नई सड़क के बनने से वर्षों से कटा हुआ अबूझमाड़ क्षेत्र देश के बड़े महानगरों से सीधे जुड़ जाएगा। इससे बस्तर अंचल में व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए और सुनहरे अवसर खुलेंगे।

मुंबई और नागपुर का सफर होगा बेहद कम समय में

नारायणपुर से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली तक सड़क का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो चुका है। इस मार्ग के तैयार होने से छत्तीसगढ़ के गढ़चिरौली से नागपुर और आगे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तक की यात्रा बेहद कम समय में पूरी की जा सकेगी। यह हाईवे घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने में गेम-चेंजर साबित होगा।

112.5 किलोमीटर की सड़क, 9 चरणों में बंटा काम

कोंडागांव से लेकर महाराष्ट्र सीमा (गढ़चिरौली) तक धुर नक्सल प्रभावित इलाकों के बीच बनने वाली इस 112.5 किमी लंबी सड़क का निर्माण कुल 9 चरणों में किया जा रहा है। योजना के तहत पहले 6 चरणों का खाका इस प्रकार है:

पहला चरण: कोंडागांव से नारायणपुर (48.6 किलोमीटर)

दूसरा चरण: नारायणपुर से गोटजमरी (10 किलोमीटर)

तीसरा चरण: गोटजमरी से अकाबेड़ा (7 किलोमीटर)

चौथा चरण: अकाबेड़ा से कस्तूरमेटा (5 किलोमीटर)

पांचवां चरण: कस्तूरमेटा से कुतुल (20 किलोमीटर)

चरण: कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) (करीब 22 किलोमीटर)शेष तीन चरणों में महाराष्ट्र सीमा के भीतर और आगे के लिंकेज का काम पूरा किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस सड़क के बन जाने से सुरक्षा बलों को भी नक्सल विरोधी अभियानों में मदद मिलेगी और स्थानीय ग्रामीणों को भी राशन, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक आपातकालीन सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।