आमने-सामने की टक्कर का मतलब दोनों चालकों की गलती नहीं: बिलासपुर क्लेम कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलील खारिज कर दिया ₹38.77 लाख का मुआवजा
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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आमने-सामने की टक्कर का मतलब दोनों चालकों की गलती नहीं: बिलासपुर क्लेम कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलील खारिज कर दिया ₹38.77 लाख का मुआवजा
बिलासपुर। सड़क दुर्घटना दावा मामलों में बीमा कंपनियों द्वारा अक्सर उठाई जाने वाली ‘योगदायी लापरवाही’ (Contributory Negligence) की दलील पर पंचम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल दो वाहनों की आमने-सामने (Head-on Collision) टक्कर होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि दोनों चालक बराबर के दोषी थे।अधिकरण ने एक ही सड़क हादसे में जान गंवाने वाले ससुर और दामाद के अलग-अलग दावा प्रकरणों का निपटारा करते हुए मृतकों के आश्रितों को कुल 38,77,486.80 रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।क्या था पूरा मामला?घटना 13 मार्च 2025 की है। कोटा निवासी राजमिस्त्री महेश राम अपने ससुर बदूर राम को मोटरसाइकिल पर बिठाकर सोनतराई से लौट रहे थे।
इसी दौरान उदयपुर तहसील कार्यालय (डमुरडीह, जिला सरगुजा) के पास सामने से आ रही एक होंडा अमेज कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। आरोप है कि कार चालक मनव्वर मंसूरी वाहन को बेहद लापरवाहीपूर्वक चला रहा था। इस भीषण दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उपचार के दौरान ससुर-दामाद दोनों की मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में कार चालक के खिलाफ अपराध दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था।कोर्ट ने क्यों खारिज की बीमा कंपनी की दलील?सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया था कि चूंकि हादसा आमने-सामने की टक्कर से हुआ, इसलिए मोटरसाइकिल चालक की भी बराबर की लापरवाही थी। अधिकरण ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा:केवल सड़क दुर्घटना होने या आमने-सामने की टक्कर से साझा लापरवाही साबित नहीं होती।कार चालक की ओर से अपनी बेगुनाही का कोई स्वतंत्र साक्ष्य (Evidence) पेश नहीं किया गया।
आरोपी कार चालक स्वयं भी गवाही देने अदालत नहीं पहुंचा।ऐसे में माननीय सुप्रीम कोर्ट की नजीर (Precedent) का हवाला देते हुए अधिकरण ने पूरी तरह कार चालक को ही हादसे का दोषी माना। इसके अलावा बीमा कंपनी ने वाहन के दस्तावेजों और ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता पर भी सवाल उठाए थे, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड और जब्ती पत्रक की जांच के बाद अदालत ने पाया कि दुर्घटना के समय कार का बीमा, आरसी, परमिट और चालक का लाइसेंस पूरी तरह वैध थे।
दोनों परिवारों को मिला इतना मुआवजा
अदालत ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों को सही पाते हुए दोनों मृतकों के परिवारों के पक्ष में निम्नानुसार अवार्ड पारित किया:मृतक बदूर राम के आश्रितों को: ₹13,65,509.20मृतक महेश राम के आश्रितों को: ₹25,11,977.60कुल मुआवजा राशि: ₹38,77,486.80अधिकरण के इस फैसले से अब उन पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें बीमा कंपनियां ‘साझा लापरवाही’ का बहाना बनाकर क्लेम देने से परेशान करती हैं।





