ईंधन की महंगाई और किल्लत की दोहरी मार: छत्तीसगढ़ में माल भाड़ा ₹10 प्रति किमी तक बढ़ा, रविवार को राष्ट्रीय बैठक
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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ईंधन की महंगाई और किल्लत की दोहरी मार: छत्तीसगढ़ में माल भाड़ा ₹10 प्रति किमी तक बढ़ा, रविवार को राष्ट्रीय बैठक
रायपुर।देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और बाजार में डीजल की भारी किल्लत ने लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई सेक्टर को संकट में डाल दिया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़े में प्रति किलोमीटर 10 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। ईंधन के दामों में कटौती न होने पर छत्तीसगढ़ एसोसिएशन ने आगे किराया और बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस संकट से निपटने के लिए नेशनल ट्रांसपोर्टरों ने आगामी रविवार को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक बुलाई है।
भारी वाहनों के संचालन पर सबसे बड़ा संकट
लागत में भारी वृद्धि: डीजल महंगा होने से 25, 30 और 35 टन क्षमता वाले भारी ट्रकों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।किराया संशोधन: वर्तमान में इन भारी वाहनों का औसत किराया करीब ₹30 प्रति किलोमीटर है।नया रेट: ट्रांसपोर्टरों के नए प्रस्ताव के लागू होते ही यह दर बढ़कर ₹40 प्रति किलोमीटर हो जाएगी।
छोटी गाड़ियों का सफर हुआ और भी खर्चीला
मौजूदा दर: 12 टन से कम क्षमता वाले छोटे मालवाहक वाहनों का वर्तमान किराया लगभग ₹60 प्रति किलोमीटर है।संभावित दर: घाटे की भरपाई के लिए इसे बढ़ाकर ₹80 प्रति किलोमीटर किया जा रहा है।बढ़ती लागत के मुख्य कारण: सीमित माल क्षमता, लगातार टोल टैक्स, फुटकर खर्चे और वापसी में गाड़ी खाली लौटने की मजबूरी।प्रमुख रूटों पर भाड़ा वृद्धि का गणित (अनुमानित बदलाव)रायपुर से जगदलपुर (300 किमी): वर्तमान भाड़ा ₹9,000 से बढ़कर ₹12,000 होगा।रायपुर से नागपुर (290 किमी): वर्तमान भाड़ा ₹8,700 से बढ़कर ₹11,600 होगा।रायपुर से भोपाल (680 किमी): वर्तमान भाड़ा ₹20,400 से बढ़कर ₹27,200 होगा।रायपुर से इंदौर (870 किमी): वर्तमान भाड़ा ₹26,100 से बढ़कर ₹34,800 होगा।
डीजल संकट से थमी वाहनों की रफ्तार,व्यापार प्रभावित
सप्लाई चेन ठप: कीमतों में बढ़ोतरी के साथ पंपों पर डीजल की भारी कमी हो गई है।ग्रामीण इलाकों पर असर: दूरदराज के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में गाड़ियों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
कारोबारियों की चिंता:
ईंधन न मिलने से बाजार में वाहनों की उपलब्धता घट गई है, जिससे उद्योगों को समय पर माल की डिलीवरी नहीं मिल पा रही है।





