छेड़छाड़ के आरोपी को 3 साल की जेल; निचली अदालत ने किया था बरी, सत्र न्यायालय ने सुनाई सजा
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छेड़छाड़ के आरोपी को 3 साल की जेल; निचली अदालत ने किया था बरी, सत्र न्यायालय ने सुनाई सजा
बालोद। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए बालोद जिला न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्वेता उपाध्याय गौर ने महिला से छेड़छाड़ के आरोपी करण राणा (26 वर्ष) को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि इस मामले में निचली अदालत (दल्लीराजहरा) ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था, जिसके खिलाफ अभियोजन ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
क्या था पूरा मामला?
विशेष लोक अभियोजक घनश्याम सिंह साहू के मुताबिक, घटना 25 जनवरी 2019 की है। पीड़िता अपने एक रिश्तेदार के साथ बाजार गई थी। वापसी के दौरान आरोपी करण राणा ने पीड़िता के साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि बुरी नीयत से उसका दुपट्टा पकड़कर खींचने लगा। पीड़िता की शिकायत और पुलिस जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई थी।
निचली अदालत के फैसले को सत्र न्यायालय ने पलटा
शुरुआती सुनवाई में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दल्लीराजहरा ने आरोपी को दोषमुक्त (बरी) कर दिया था। अभियोजन पक्ष ने इस निर्णय को विधि और तथ्यों के विपरीत बताते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय बालोद में चुनौती दी। सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों और बयानों पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी को दंडित किया।
इन धाराओं में मिली सजा:
धारा 354(ख): तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 100 रुपये अर्थदंड।
धारा 354(क): छह माह का सश्रम कारावास और 100 रुपये अर्थदंड।
धारा 354(घ): छह माह का सश्रम कारावास और 100 रुपये अर्थदंड।
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। न्यायालय के इस फैसले को महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर कड़ा प्रहार माना जा रहा है।






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