UP Police का कड़ा संदेश: ‘साहब’ से सीधे ‘सिपाही’ बने डिप्टी SP; अय्याशी ने छीनी वर्दी की धमक!

 UP Police का कड़ा संदेश: ‘साहब’ से सीधे ‘सिपाही’ बने डिप्टी SP; अय्याशी ने छीनी वर्दी की धमक!

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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UP Police का कड़ा संदेश: ‘साहब’ से सीधे ‘सिपाही’ बने डिप्टी SP; अय्याशी ने छीनी वर्दी की धमक!

लखनऊ/गोरखपुर: उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और अनैतिकता के खिलाफ एक ऐसी ऐतिहासिक कार्रवाई हुई है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। शासन ने उन्नाव के तत्कालीन डिप्टी एसपी (CO) कृपा शंकर कन्नौजिया को उनके मूल पद ‘सिपाही’ पर डिमोट (Demote) कर दिया है। तीन साल पहले शुरू हुआ एक ‘होटल कांड’ आज 59 वर्षीय कन्नौजिया के करियर के अंत का काल बन गया।

छुट्टी लेकर ‘लापता’ हुए थे साहब, पत्नी की सूझबूझ से खुला राज

यह मामला जुलाई 2021 का है। उस वक्त बीघापुर (उन्नाव) में तैनात सीओ कृपा शंकर कन्नौजिया ने पारिवारिक कारणों का हवाला देकर छुट्टी ली थी। लेकिन घर जाने के बजाय, वे कानपुर के एक होटल में एक महिला सिपाही के साथ ‘क्वालिटी टाइम’ बिताने चले गए। पकड़े जाने के डर से उन्होंने अपने सरकारी और निजी, दोनों मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिए थे।

जब पति से संपर्क नहीं हुआ, तो अनहोनी की आशंका में उनकी पत्नी ने एसपी उन्नाव से मदद मांगी। पुलिस ने जब मोबाइल की आखिरी लोकेशन ट्रेस की, तो वह कानपुर के एक होटल की निकली। जब पुलिस टीम वहां पहुंची, तो डिप्टी एसपी साहब अपनी ही विभाग की महिला सिपाही के साथ रंगे हाथों पकड़े गए।

CCTV ने दी गवाही, विभागीय जांच में गिरे गाज

इस शर्मनाक घटना के बाद विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे। होटल के सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों ने उनकी संलिप्तता की पुष्टि की। उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत चली लंबी जांच के बाद, शासन ने इसे ‘गंभीर कदाचार’ माना।

 

सीधे गोरखपुर PAC में ‘कांस्टेबल’ के पद पर तैनाती

जांच पूरी होने के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी सभी प्रमोशन रद्द कर दीं और उन्हें वापस उनके शुरुआती पद ‘सिपाही’ पर भेज दिया। ताजा आदेश के मुताबिक, अब कृपा शंकर कन्नौजिया गोरखपुर स्थित 26वीं वाहिनी पीएसी (PAC) में बतौर कांस्टेबल ड्यूटी करेंगे।

निष्कर्ष: यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है, जो पद की गरिमा को ताक पर रखकर अनुशासन की सीमाएं लांघते हैं। 59 की उम्र में, जहां अधिकारी रिटायरमेंट की शान की तैयारी करते हैं, वहां कन्नौजिया को अब हाथ में डंडा लेकर दोबारा सिपाही की ड्यूटी करनी होगी।