छत्तीसगढ़ में गुमशुदा बच्चों का संकट: 5 साल में 400 से ज्यादा बच्चे लापता, देश में छठे स्थान पर प्रदेश

 छत्तीसगढ़ में गुमशुदा बच्चों का संकट: 5 साल में 400 से ज्यादा बच्चे लापता, देश में छठे स्थान पर प्रदेश

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

******************************

 

 

 

छत्तीसगढ़ में गुमशुदा बच्चों का संकट: 5 साल में 400 से ज्यादा बच्चे लापता, देश में छठे स्थान पर प्रदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बच्चों के लापता होने के आंकड़े डराने वाले हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट’ के अनुसार, छत्तीसगढ़ बच्चों के गायब होने के मामले में देश में छठवें स्थान पर है। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि छत्तीसगढ़ पिछले 5 साल से लगातार देश के टॉप-10 राज्यों की सूची में बना हुआ है।

जांजगीर-चांपा और रायपुर हॉटस्पॉट

प्रदेश के भीतर जिलों की बात करें तो जांजगीर-चांपा जिला बच्चों के लापता होने के मामलों में सबसे आगे है। इसके बाद राजधानी रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों में सर्वाधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ते शहरीकरण के कारण इन शहरों में प्रवासी परिवारों की आवाजाही अधिक है, जिससे बच्चे अक्सर रास्ता भटक जाते हैं या गिरोहों के चंगुल में फंस जाते हैं।

‘ऑपरेशन मुस्कान’ से मिली थोड़ी राहत

लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत अब तक प्रदेशभर से 669 बच्चों को सुरक्षित खोजकर उनके परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है। इनमें भी सबसे ज्यादा सफलता जांजगीर-चांपा जिले में मिली है।

मानव तस्करी और संगठित गिरोह का हाथ

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इन घटनाओं के पीछे मानव तस्करी एक बड़ा कारण है। संगठित गिरोह मासूम बच्चों को बड़े शहरों में काम दिलाने या पैसों का लालच देकर ले जाते हैं और बाद में उन्हें बंधुआ मजदूरी या अन्य अवैध कार्यों में धकेल देते हैं। प्रशासन अब इन गिरोहों पर नकेल कसने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दे रहा है।