जनता की आवाज़ के आगे झुकी सरकार: होली पर शराब दुकानें रहेंगी बंद, पार्षद विजय साव ने बताया ‘नारी शक्ति और जनभावना की जीत’

 जनता की आवाज़ के आगे झुकी सरकार: होली पर शराब दुकानें रहेंगी बंद, पार्षद विजय साव ने बताया ‘नारी शक्ति और जनभावना की जीत’

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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जनता की आवाज़ के आगे झुकी सरकार: होली पर शराब दुकानें रहेंगी बंद, पार्षद विजय साव ने बताया ‘नारी शक्ति और जनभावना की जीत’

 

महासमुंद: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने अपनी नई आबकारी नीति में बड़ा संशोधन करते हुए होली के दिन शराब दुकानें बंद रखने का आश्वासन दिया है। इससे पहले सरकार ने राजस्व वृद्धि और अवैध बिक्री रोकने के तर्क के साथ होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस को ‘ड्राई डे’ की सूची से हटा दिया था, जिसका प्रदेश भर में कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध किया।

 

विरोध की मुख्य वजह: महिला सुरक्षा और सामाजिक शांति

कांग्रेस पार्टी और महिला संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तर्क दिया था कि होली जैसे त्योहार पर शराब की उपलब्धता से अपराध और हुड़दंग बढ़ता है।

 

महिला सुरक्षा: शराब पीकर असामाजिक तत्वों द्वारा महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अभद्रता की आशंका जताई गई थी।

अपराध में वृद्धि: त्यौहार के जोश में नशे का मिश्रण मारपीट, सड़क दुर्घटनाओं और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं को जन्म देता है।

आस्था का अपमान: कांग्रेस नेताओं ने इसे पवित्र त्यौहार की गरिमा के खिलाफ और केवल ‘राजस्व का लालच’ करार दिया था।

महासमुंद में जश्न: “यह न्याय की जीत है”

महासमुंद के पार्षद विजय साव ने सरकार के इस यू-टर्न को अपनी पार्टी और जनता के संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि “सरकार का शराब दुकानें खोलने का निर्णय समाज विरोधी था। महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक मर्यादा सर्वोपरि है। हमारे कड़े विरोध के बाद मुख्यमंत्री को झुकना पड़ा, यह नारी शक्ति और जनभावना की जीत है।”

अब केवल 4 दिन ही रहेगा ‘ड्राई डे’

हालांकि सरकार ने होली पर दुकानें बंद रखने का भरोसा दिया है, लेकिन नई आबकारी नीति के तहत अब साल में केवल 4 प्रमुख तिथियों पर ही पूर्ण शराबबंदी (Dry Day) रहेगी:

26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)

15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)

2 अक्टूबर (गांधी जयंती)

18 दिसंबर (गुरु घासीदास जयंती)

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस संभावित बदलाव को आगामी त्यौहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता, विशेषकर महिलाओं के आक्रोश को शांत करने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है,

विजय साव पार्षद महासमुंद।