छत्तीसगढ़-तेलंगाना बिजली विवाद: 3,600 करोड़ के बकाया पर जमी बर्फ पिघलने के आसार, बातचीत के लिए रायपुर आएगी तेलंगाना की टीम

 छत्तीसगढ़-तेलंगाना बिजली विवाद: 3,600 करोड़ के बकाया पर जमी बर्फ पिघलने के आसार, बातचीत के लिए रायपुर आएगी तेलंगाना की टीम

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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छत्तीसगढ़-तेलंगाना बिजली विवाद: 3,600 करोड़ के बकाया पर जमी बर्फ पिघलने के आसार, बातचीत के लिए रायपुर आएगी तेलंगाना की टीम

रायपुर: छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच पिछले छह वर्षों से चला आ रहा 3,600 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल का विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने इस मामले को कानूनी लड़ाई के बजाय आपसी संवाद से हल करने की पहल की है। जानकारी के अनुसार, इस महीने के अंत या मार्च तक तेलंगाना के ऊर्जा मंत्री एक उच्च स्तरीय टीम के साथ रायपुर का दौरा कर सकते हैं।

नियामक आयोग में सुनवाई टली, बातचीत को प्राथमिकता

राज्य विद्युत नियामक आयोग में इस मामले पर 23 जनवरी को सुनवाई होनी थी। लेकिन छत्तीसगढ़ पावर कंपनी के अनुरोध पर आयोग ने इसे अप्रैल तक टाल दिया है। सूत्रों का कहना है कि तेलंगाना सरकार के वार्ता प्रस्ताव के बाद छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने यह कदम उठाया है ताकि आपसी सहमति के लिए समय मिल सके।

विवाद की जड़: मड़वा प्लांट की बिजली और भुगतान का अंतर

यह पूरा विवाद तत्कालीन रमन सिंह सरकार के दौरान हुए एक समझौते से जुड़ा है। इस समझौते के तहत कोरबा के मड़वा प्लांट से तेलंगाना को 1,000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जानी थी।

छत्तीसगढ़ का दावा: कुल बकाया राशि बढ़कर 3,600 करोड़ रुपये हो गई है।

तेलंगाना का पक्ष: पूर्व में तेलंगाना बिजली बोर्ड ने केवल 2,100 करोड़ का बकाया स्वीकार किया था, जिसका भुगतान भी किस्तों में नहीं किया गया।

भुगतान न होने के कारण छत्तीसगढ़ ने बिजली की आपूर्ति पहले ही रोक दी है।

भ्रष्टाचार के आरोपों ने फंसाया पेंच

तेलंगाना की वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार के समय हुई बिजली खरीदी में 1,300 करोड़ के नुकसान और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिसकी न्यायिक जांच जारी है। इसी जांच के कारण समाधान की राह कठिन बनी हुई है। यदि बातचीत के जरिए समझौता नहीं होता है, तो छत्तीसगढ़ पावर कंपनी बकाया वसूली के लिए पुनः नियामक आयोग का रुख करेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बढ़ती धमक

छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन के मामले में सरप्लस राज्य बनकर उभरा है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक:

वर्ष 2000 में राज्य की क्षमता 1,400 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 30,000 मेगावाट हो गई है।

राज्य की अपनी घरेलू मांग मात्र 6,800 मेगावाट है, जिसके चलते छत्तीसगढ़ वर्तमान में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों को बिजली बेच रहा है।

साथ ही, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 60 हजार घरों में सोलर पैनल लगाकर राज्य अक्षय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।