छत्तीसगढ़ में आयुष्मान संकट: 1500 करोड़ का भुगतान अटका, निजी अस्पतालों ने बंद किया इलाज; कांग्रेस का सरकार पर तीखा प्रहार
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ में आयुष्मान संकट: 1500 करोड़ का भुगतान अटका, निजी अस्पतालों ने बंद किया इलाज; कांग्रेस का सरकार पर तीखा प्रहार
रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश के निजी अस्पतालों ने 1500 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भुगतान न होने के विरोध में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों के सामने स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव पैदा हो गया है।
निजी अस्पतालों का कड़ा रुख: ‘भुगतान नहीं तो इलाज नहीं’
छत्तीसगढ़ के निजी अस्पताल एसोसिएशन (AHPI) ने स्पष्ट कर दिया है कि भारी भरकम बकाया राशि अटके होने के कारण अब उनके लिए कैशलेस इलाज जारी रखना संभव नहीं है।
अल्टीमेटम: अस्पतालों ने 31 जनवरी तक भुगतान न होने पर 1 फरवरी से पूर्ण रूप से सेवा बंद करने की चेतावनी दी है।
बकाया राशि: एसोसिएशन का दावा है कि पिछले कई महीनों से लगभग 1500 से 1700 करोड़ रुपये का फंड अटका हुआ है।
पोस्टर वार: कई अस्पतालों ने परिसर में पोस्टर लगाकर मरीजों को सूचित कर दिया है कि अब इलाज के लिए पैसे देने होंगे।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: ‘भाजपा सरकार की नीयत और विजन में खोट’
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस स्थिति को लेकर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है।
पूर्व सीएम की चिंता: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से बकाया भुगतान की समयसीमा तय करने की मांग की।
कांग्रेस का आरोप: प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि सरकार भ्रष्टाचार में व्यस्त है और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास न नियत है और न ही विजन।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का पक्ष
विपक्ष के हमलों और अस्पतालों की हड़ताल के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरकार का बचाव किया है।
बकाये का दोष: मंत्री जायसवाल ने कहा कि अधिकांश देनदारियां पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की हैं, जिसे वर्तमान सरकार धीरे-धीरे चुका रही है।
भुगतान का आश्वासन: उन्होंने हाल ही में बयान दिया कि विभाग ने वित्त विभाग से 375 करोड़ रुपये मांगे हैं और अगले कुछ दिनों में जुलाई तक का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।
कड़ी चेतावनी: मंत्री ने यह भी कहा कि फंड की कोई कमी नहीं है। उन्होंने उन अस्पतालों को लिखित में देने को कहा है जो इलाज से मना कर रहे हैं, ताकि उन पर परीक्षण कर कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष: फिलहाल सरकार और निजी अस्पतालों के बीच खींचतान जारी है, जिसका सीधा खामियाजा प्रदेश के गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। यदि जल्द ही बीच का रास्ता नहीं निकला, तो 1 फरवरी से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।












