बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 216 पटवारियों की RI पदोन्नति निरस्त, चयन प्रक्रिया में ‘भाई-भतीजावाद’ पर सख्त टिप्पणी

 बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 216 पटवारियों की RI पदोन्नति निरस्त, चयन प्रक्रिया में ‘भाई-भतीजावाद’ पर सख्त टिप्पणी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

 

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बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 216 पटवारियों की RI पदोन्नति निरस्त, चयन प्रक्रिया में ‘भाई-भतीजावाद’ पर सख्त टिप्पणी

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के राजस्व विभाग में पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) के पदों पर हुई पदोन्नति को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस एन.के. व्यास की एकल पीठ ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और पक्षपात के प्रमाण मिलने के बाद पूरी पदोन्नति परीक्षा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के साथ ही प्रदेश के 216 पटवारियों की पदोन्नति स्वतः समाप्त हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

राजस्व विभाग द्वारा आयोजित पदोन्नति परीक्षा के परिणामों को लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और अपात्र लोगों को लाभ पहुँचाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड्स और साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘दूषित थी परीक्षा प्रणाली’

सुनवाई के दौरान जस्टिस एन.के. व्यास ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से यह संकेत मिलते हैं कि पदोन्नति परीक्षा प्रणाली ‘दूषित’ थी। कोर्ट ने आगे कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इसमें ‘भाई-भतीजावाद’ व ‘पक्षपात’ के स्पष्ट संकेत मिले हैं।

पदोन्नति निरस्त, नए सिरे से परीक्षा के निर्देश

कोर्ट के इस फैसले के बाद वर्तमान चयन सूची के आधार पर प्रमोट हुए 216 राजस्व निरीक्षकों को अब वापस पटवारी पद पर लौटना होगा। हालांकि, कोर्ट ने राज्य शासन को राहत देते हुए यह छूट दी है कि वे नियमों का पालन करते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ नए सिरे से पदोन्नति परीक्षा आयोजित कर सकते हैं।

विभागीय गलियारों में हड़कंप

हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। कोर्ट की टिप्पणी ने विभाग की कार्यप्रणाली और चयन समितियों की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब यह देखना होगा कि राज्य शासन इस फैसले के बाद नई चयन प्रक्रिया कब शुरू करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।