धान खरीदी में आई जबरदस्त तेजी, अब तक 2.68 लाख मीट्रिक टन की खरीदी, किसानों को ₹581 करोड़ का भुगतान
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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दुर्ग: धान खरीदी में आई जबरदस्त तेजी, अब तक 2.68 लाख मीट्रिक टन की खरीदी, किसानों को ₹581 करोड़ का भुगतान
दुर्ग। राज्य सरकार की पारदर्शी और किसान हितैषी नीतियों के चलते जिले में धान खरीदी अभियान सुचारू रूप से जारी है। जिला प्रशासन द्वारा की गई पुख्ता व्यवस्थाओं और त्वरित भुगतान प्रक्रिया से किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। जिले में अब तक 2,68,901.52 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है, जिसकी कुल लागत 63,749.45 लाख रुपये है।
50 हजार से अधिक किसान हुए लाभान्वित
धान बेचने के बाद किसानों के बैंक खातों में राशि का हस्तांतरण तेजी से किया जा रहा है। अब तक जिले के 50,718 किसानों को 58,163.09 लाख रुपये का ऑनलाइन भुगतान प्राप्त हो चुका है। अपनी उपज का वाजिब दाम समय पर मिलने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
‘तुंहर टोकन’ एप से मिली बड़ी राहत
धान खरीदी की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार ने ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप की सुविधा दी है। अब किसान अपनी सुविधानुसार 24 घंटे में कभी भी टोकन काट सकते हैं। समय की बाध्यता खत्म होने से किसानों को लंबी कतारों और इंतजार से मुक्ति मिली है, जो इस बार खरीदी केंद्रों में व्यवस्था सुधार का बड़ा कारण बना है।
धान उठाव में आई तेजी, बारदाने भी पर्याप्त
उपार्जन केंद्रों में धान के जाम होने की स्थिति को टालने के लिए उठाव की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अब तक 88,936.60 मीट्रिक टन धान के लिए डीओ/टीओ जारी किया जा चुका है, जिसमें से 65,765.60 मीट्रिक टन धान का उठाव केंद्रों से हो चुका है। केंद्रों में बारदानों की भी कोई कमी नहीं है, वर्तमान में 38,20,547 बारदाने उपलब्ध हैं।
बिचौलियों पर लगाम: 25 हजार किसानों ने किया रकबा समर्पण
सरकार की पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन करते हुए किसान भी जागरूक भूमिका निभा रहे हैं। जिले के 25,932 लघु कृषकों ने धान बेचने के बाद स्वेच्छा से 501.86 हेक्टेयर रकबा समर्पित कर दिया है। किसानों के इस कदम से बिचौलियों द्वारा अवैध धान खपाने की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है।
प्रशासनिक प्रबंधों से किसान संतुष्ट
कलेक्टर के निर्देशन में सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक निगरानी के कारण पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से संपन्न हो रही है, जिससे जिले के किसान पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहे हैं।










