हसदेव बचाओ आंदोलन में जंगल कटाई और कोयला खनन रोकने अंबिकापुर में धरना, मुख्यमंत्री-राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

 हसदेव बचाओ आंदोलन में जंगल कटाई और कोयला खनन रोकने अंबिकापुर में धरना, मुख्यमंत्री-राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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हसदेव बचाओ संघर्ष समिति, सरगुजा ने मंगलवार को गांधी चौक, अंबिकापुर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर हसदेव अरण्य क्षेत्र में चल रही पेड़ों की कटाई को तत्काल बंद करने और कोयला खनन परियोजनाओं की स्वीकृतियां निरस्त करने की मांग की।

 

सरगुजा।हसदेव बचाओ संघर्ष समिति, सरगुजा ने मंगलवार को गांधी चौक, अंबिकापुर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर हसदेव अरण्य क्षेत्र में चल रही पेड़ों की कटाई को तत्काल बंद करने और कोयला खनन परियोजनाओं की स्वीकृतियां निरस्त करने की मांग की। धरना उपरांत समिति ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

 

समिति ने ज्ञापन में बताया कि हसदेव अरण्य में राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को परसा ईस्ट केते बासेन, परसा एवं केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक आवंटित हैं, जिन्हें एमडीओ अनुबंध के जरिए अदानी समूह को सौंपा गया है। इन तीनों ब्लॉकों में खनन के लिए करीब 12 लाख पेड़ों की कटाई हो रही है।

हसदेव क्षेत्र विलुप्तप्राय वनस्पति और वन्यजीवों का निवास है। यह क्षेत्र हसदेव, रिहंद समेत कई जीवनदायिनी नदियों का कैचमेंट एरिया है। खनन से जल स्रोत सूख रहे हैं, नदियां प्रदूषित हो रही हैं और हाथियों का प्राकृतिक रहवास खत्म हो रहा है, जिसके चलते मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है।

रामगढ़ पहाड़ी और प्राचीन नाट्यशाला पर खतरा

आंदोलनकारियों ने चेताया कि खनन और भारी विस्फोट से विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला रामगढ़ पहाड़ी गंभीर खतरे में है। यहां दरारें पड़ने लगी हैं और संरक्षित पुरातात्विक व धार्मिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। समिति ने याद दिलाया कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से हसदेव क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉक निरस्त करने का अशासकीय संकल्प पारित हुआ था। भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट भी चेतावनी देती है कि हसदेव में खदानें खुलीं तो मानव-हाथी संघर्ष विकराल रूप ले लेगा।

 

प्रमुख मांगें

हसदेव अरण्य को नो-गो क्षेत्र घोषित कर लेमरू हाथी रिजर्व व उसके 10 किमी दायरे में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध।

रामगढ़ पहाड़ी व प्राचीन नाट्यशाला पर हो रहे नुकसान की वैज्ञानिक जांच और खनन पर रोक।

केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया निरस्त।

परसा कोल ब्लॉक में फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई और वन स्वीकृति रद्द।

प्रभावित ग्रामीणों पर दर्ज फर्जी आपराधिक मुकदमे निरस्त।

परसा ईस्ट केते बासेन परियोजना से नदियों में छोड़े जा रहे प्रदूषित अपशिष्ट पर रोक और कंपनी पर कार्यवाही।

खनन किए गए क्षेत्रों को माइनिंग क्लोजर प्लान के अनुसार पुनर्भरण कर वृक्षारोपण।

18 अक्टूबर 2024 को पेड़ गिरने से मरे मजदूर कमलेश सिदार के परिजनों को आपदा राहत मुआवजा।