छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जर्जर पुलिस आवासों पर हाईकोर्ट सख्त, 34 साल पुराने…खतरनाक स्थिति; मांगी जानकारी

 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जर्जर पुलिस आवासों पर हाईकोर्ट सख्त, 34 साल पुराने…खतरनाक स्थिति; मांगी जानकारी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर में जर्जर पुलिस आवासों की स्थिति और नए निर्माण के लिए धनराशि न दिए जाने की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डबल बेंच ने प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

 

बिलासपुर।राजधानी रायपुर में जर्जर पुलिस आवासों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान पुलिस हाउसिंग सोसायटी के एमडी के शपथपत्र में बताया गया कि सभी जर्जर आवास खाली कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने रायपुर के आमानाका स्थित पुलिस क्वार्टरों की जर्जर हालत और नए आवासों के निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि राज्य सरकार द्वारा न दिए जाने के मामले में मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।

 

उल्लेखनीय है कि इन आवासों में 24 मकान लगभग 34 साल पुराने हैं। उनकी हालत ऐसी है कि छत तक जाने वाली सीढ़ियां टूटकर गिर गईं। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि पहली मंजिल तक जाने वाली सीढ़ियां खंभों के सहारे टिकी हुई हैं। लगभग 20 परिवार वहां भगवान भरोसे रह रहे हैं।

बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस बीडी गुरु की डीबी में हुई सुनवाई में पुलिस हाउसिंग सोसायटी के मैनेजिंग डायरेक्टर आईपीएस पवन देव उपस्थित हुए।उन्होंने कोर्ट को बताया कि सभी जर्जर मकान खाली करा लिए गए हैं। इसके साथ ही शासन से 10 करोड़ रुपए मांगे गए हैं, जिससे नवीन निर्माण के साथ पुराने मकानों की रिपेयरिंग हो सके।हाईकोर्ट ने इस मामले में होने वाली प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित कर दी है।

शिक्षा सचिव की अनुपस्थिति पर हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

शिक्षा के अधिकार (आरटीई) मामले में जनहित याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव की अनुपस्थिति पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि कोर्ट को मजाक में न लें। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई में सचिव स्वयं उपस्थित होकर शपथपत्र में बताएं कि गड़बड़ी करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

 

कोर्ट ने शासन से यह भी पूछा कि गरीब बच्चों का हक मारकर बड़े घरों के बच्चों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर दाखिला दिलाने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की है? उल्लेखनीय है कि भिलाई निवासी समाजिक कार्यकर्ता भगवंत राव ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि फर्जीवाड़े से आरटीई के तहत गरीब बच्चों की सीटें कब्जाई जा रही हैं और शिक्षा विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा। याचिका में इस बात पर भी चिंता जाहिर की गई है बिना मान्यता के नर्सरी केजी तक के स्कूल गली गली में खोल दिए गए हैं। जिनकी मान्यता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।