कटक-नेरगुंडी रूट पर ट्रेन सेवाएं बहाल; कामाख्या एक्सप्रेस के 11 डिब्बे हुए थे बेपटरी

 कटक-नेरगुंडी रूट पर ट्रेन सेवाएं बहाल; कामाख्या एक्सप्रेस के 11 डिब्बे हुए थे बेपटरी

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी

 

ओडिशा में नेरगुंडी रेलवे स्टेशन के पास कामाख्या एक्सप्रेस ट्रेन रविवार को पटरी से उतर गई थी। हादसे में एक शख्स की मौत और आठ यात्री घायल हुए थे। ट्रेन के 11 डिब्बे पटरी से उतर गए थे

 

कटक।ओडिशा के कटक जिले में कटक-नेरगुंडी रेल खंड के दोनों ट्रैक पर ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं। यहां बीते दिन 12551 बंगलूरू-कामाख्या एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के 11 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए थे।

 

ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीओआर) ने एक बयान में बताया कि रविवार को कटक-भद्रक रेलवे खंड में केंद्रपाड़ा रोड और नेरगुंडी स्टेशनों के बीच हुई इस दुर्घटना के कारण ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से बाधित हुईं। मरम्मत कार्य के बाद पहली यात्री ट्रेन भुवनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या-22823) सुबह 10.25 बजे डाउन लाइन पर घटनास्थल से गुजरी। ईसीओआर के रेलकर्मियों ने रातभर मशक्कत की और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सोमवार सुबह 07:15 बजे तक प्रभावित पटरियों को बहाल कर दिया। फिलहाल ट्रैक को साफ कर दिया गया है और ट्रेनों की आवाजाही के लिए तैयार कर दिया गया। ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) को सुबह 07:40 बजे पूरी तरह से बहाल कर दिया गया था।

 

 

 

 

इससे पहले पूर्वी तटीय रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) अशोक कुमार मिश्रा ने बताया था कि सुबह 11.54 बजे मंगुली के पास निरगुंडी में एसएमवीटी बंगलूरू-कामाख्या एसी एक्सप्रेस के 11 डिब्बे पटरी से उतर गए। मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार निवासी 22 वर्षीय सुवनकर रॉय के रूप में हुई है। बताया गया कि पटरी से उतरने के बाद युवक ट्रेन से कूद गया और उसकी मौत हो गई। हालांकि, एक अधिकारी ने बताया कि रेलवे अधिकारी मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

 

पूर्वी तटीय रेलवे ने एक बयान में बताया कि एक महिला यात्री को गंभीर चोटें आई हैं और दो अन्य पुरुष यात्रियों का इलाज चल रहा है। कटक के जिला कलेक्टर दत्तात्रेय भाऊसाहेब शिंदे ने पहले कहा था कि दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत होने की खबर है और आठ अन्य घायल हो गए, लेकिन रेलवे ने दावा किया कि घायलों की संख्या तीन ही है।

 

 

 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया, ‘चार अन्य लोगों को अस्पताल ले जाया गया, उन्हें पटरी से उतरने के कारण चोटें नहीं आईं, बल्कि ये लोग बंगलूरू में इलाज के बाद घर लौट रहे मरीज थे। उन्हें भी पटरी से उतरी बोगियों से बचाया गया और अस्पताल ले जाया गया।’ उन्होंने बताया कि घायलों की संख्या सात नहीं, बल्कि तीन थी।

 

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दुर्घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा, ‘अधिकारी मौके पर हैं। हर संभव मदद सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने का काम किया जा रहा है। सहायता के लिए हेल्पलाइन सक्रिय की गई हैं।

 

एससीबी एमसीएच के प्रशासनिक अधिकारी सुभाष चंद्र रे ने बताया, ‘एक व्यक्ति की मौत हो गई। सात घायलों में तीन पुरुष और चार महिलाएं हैं।’ अग्निशमन सेवा के महानिदेशक सुधांशु सारंगी ने बताया कि एनडीआरएफ और ओडीआरएएफ के साथ अग्निशमन सेवा कर्मियों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और कुछ ही घंटों में बचाव अभियान पूरा कर लिया गया।

इस बीच दुर्घटना स्थल से फंसे यात्रियों को लेकर एक विशेष ट्रेन कामाख्या के लिए रवाना हुई। रेलवे ने मृतक यात्री और घायल व्यक्तियों के लिए अनुग्रह राशि की घोषणा की। आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। ऐसे ही गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख और सामान्य रूप से घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।’

 

रेलवे ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत कोलकाता के दक्षिण पूर्वी सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) बृजेश मिश्रा ने रविवार रात कटक के पास पटरी से उतरने वाली जगह का निरीक्षण किया। इसमें कहा गया कि पटरी से उतरने की घटना और उससे जुड़े मामले के बारे में जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति और साक्ष्य देने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति 1 और 2 अप्रैल को खुर्दा रोड डिवीजन के डीआरएम कार्यालय, जटनी (खुर्दा रोड) आकर जानकारी दे सकता है। इस मामले पर आम लोग रेलवे सुरक्षा आयुक्त, दक्षिण पूर्वी सर्किल, 14, स्ट्रैंड रोड, 12वीं मंजिल, कोइलाघाट, कोलकाता-700001 को लिख सकते हैं।

 

बताया गया कि पटरी से उतरी ट्रेन के एक दर्जन से अधिक यात्री मौसम और सदमे की वजह से बीमार हो गए। उनका इलाज पटरी से उतरी जगह के पास अस्थायी स्वास्थ्य शिविर में किया गया। उनका इलाज कर रहे एक डॉक्टर ने बताया कि कुछ यात्रियों को किसी भी तरह की चोट के बाद पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से बचाने के लिए सामान्य सलाइन दी गई। उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

 

 

 

कटक कलेक्टर ने बताया कि कुछ यात्री अचानक वातानुकूलित बोगियों से बाहर आ गए और उन्हें भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्होंने बताया कि यात्रियों को पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी उपलब्ध कराया गया। सभी घायलों को कटक के सरकारी एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एससीबी एमसीएच) में भर्ती कराया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन बंगलूरू से असम के गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन जा रही थी। यह दुर्घटना हावड़ा-चेन्नई मार्ग की डाउन लाइन पर हुई, जिससे ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं। हावड़ा-विशाखापत्तनम अप लाइन पर मेल एक्सप्रेस ट्रेनें सबसे सामान्य रूट पर ही चल रही हैं, जबकि डाउन लाइन की 21 ट्रेनों को सामान्य बारंग-कटक-नेरगुंडी मार्ग के बजाय बारंग-नराज-कपिलास रोड के रास्ते भेजा गया।

उन्होंने बताया कि दुर्घटना स्थल को जल्द से जल्द साफ करने के प्रयास किए जा रहे हैं और अप लाइन को पहले ही चालू कर दिया गया है। पटरी से उतरे कोच की एक महिला यात्री ने कहा कि मैं ऊपर की बर्थ पर सो रही थी और पटरी से उतरने के कारण नीचे गिर गई। बर्थ पर रखा सारा सामान भी नीचे गिर गया। उसने कहा कि ट्रेन में यात्रा कर रहे कुछ बुजुर्ग, बच्चे और मरीज पटरी से उतरने के बाद डर गए और चीखने लगे

 

स्थानीय निवासी रामा साहू ने कहा, ‘जब हम मौके पर पहुंचे तो कई लोग पानी के लिए रो रहे थे। पटरी से उतरने के कारण उनकी पानी की बोतलें खो गई थीं। हमने अग्निशमन कर्मियों के पहुंचने से पहले कुछ बुजुर्गों को बचाया।’ ओपीसीसी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और कहा, ‘रेलवे अधिकारियों की अत्यधिक लापरवाही के कारण अक्सर ट्रेन दुर्घटनाएं हो रही हैं।’ उन्होंने कहा कि ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है।