धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा छत्तीसगढ़ को लूटने आते हैं”: पूर्व सीएम भूपेश बघेल का बड़ा हमला; कहा- ‘ज्ञान नहीं, यहाँ सिर्फ टोटका होता है’
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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धीरेंद्र शास्त्री और प्रदीप मिश्रा छत्तीसगढ़ को लूटने आते हैं”: पूर्व सीएम भूपेश बघेल का बड़ा हमला; कहा- ‘ज्ञान नहीं, यहाँ सिर्फ टोटका होता है’
रायपुर |छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर प्रखर कथावाचकों पंडित धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर धाम) और पंडित प्रदीप मिश्रा को अपने निशाने पर लिया है। बिलासपुर के लिंगियाडीह में एक धरने को समर्थन देने पहुंचे बघेल ने मीडिया से चर्चा के दौरान इन दोनों धर्मगुरुओं पर राज्य में अंधविश्वास फैलाने और आर्थिक लाभ के लिए आने का गंभीर आरोप लगाया।
‘लूटने और चंदा बटोरने’ का आरोप: बघेल ने कड़े शब्दों में कहा कि ये दोनों कथावाचक छत्तीसगढ़ में केवल चंदा इकट्ठा करने और राज्य को “लूटने” के उद्देश्य से आते हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि इन कथावाचकों को चंदा देना बंद करें, जिसके बाद वे चाहें तो प्रवचन देना जारी रखें।
‘टोटका’ बनाम ‘ज्ञान’: बघेल ने प्रदीप मिश्रा और धीरेंद्र शास्त्री की शैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के भागवत आचार्य भक्ति, ज्ञान और जीवन जीने की सीख देते हैं, लेकिन ये लोग केवल “टोटका” और अंधविश्वास फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदीप मिश्रा अब भगवान की कथा छोड़कर टोटकों का प्रचार कर रहे हैं।
सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग: पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को सरकारी विमान से बुलाए जाने और मंत्रियों द्वारा उनकी अगवानी किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे “सरकारी खजाने की चोरी” और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करार दिया।
बीजेपी के एजेंट का तमगा: बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री को भारतीय जनता पार्टी का “एजेंट” बताया और कहा कि वे धर्म की आड़ में राजनीतिक एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने शास्त्री को शास्त्रार्थ करने की खुली चुनौती भी दी।
धीरेंद्र शास्त्री का पलटवार:
भूपेश बघेल के आरोपों पर भिलाई में अपनी कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “हिंदुओं को एकजुट करना और राष्ट्रवाद जगाना अगर अंधविश्वास है, तो ऐसी सोच रखने वालों को देश छोड़ देना चाहिए।” शास्त्री ने यह भी जोड़ा कि वे राजनीतिज्ञ नहीं हैं, लेकिन सनातन का विरोध करने वालों को वे जवाब देना जानते हैं।
यह विवाद छत्तीसगढ़ में धर्म और राजनीति के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है, जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे पर “सनातन विरोधी” और “अंधविश्वास को बढ़ावा देने” वाले होने का आरोप लगा रहे हैं।










