साइबर सेल रायपुर रेंज ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत अंतरराज्यीय सिम फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है.

 साइबर सेल रायपुर रेंज ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत अंतरराज्यीय सिम फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है.

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार चौधरी

+++++++++++++++++++++++++++++++++++

राजस्थान, मध्यप्रदेश, रायपुर, दुर्ग और धमतरी से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. आरोपी ग्राहकों की ई-केवाईसी जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी करते थे, जिनका इस्तेमाल म्यूल अकाउंट से जुड़ी साइबर ठगी में होता था. अब तक 7000 से अधिक सिम कार्ड और 590 मोबाइल की पहचान हो चुकी है. इन सिम का उपयोग संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों में किया जा रहा था.

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़े साइबर अपराध रैकेट का पर्दाफाश हुआ है. रायपुर रेंज साइबर सेल पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह फर्जी ई-केवाईसी और डी-केवाईसी के जरिए हजारों सिम कार्ड सक्रिय करता था और उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट्स से जुड़े ब्रोकर और ऑपरेटरों को बेचता था. गिरफ्तार आरोपियों में POS एजेंट, सिम कार्ड वितरक और संवर्धक शामिल हैं. इन्हें राजस्थान, मध्यप्रदेश, रायपुर, दुर्ग और धमतरी से पकड़ा गया. पुलिस ने जांच के दौरान अब तक 7000 से अधिक फर्जी सिम कार्ड और 590 मोबाइल की पहचान की है. यह सिम कार्ड भारत में जारी किए गए थे लेकिन इनका उपयोग संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों में हो रहा था.

ऑपरेशन साइबर शील्ड सिम फ्रॉड का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बेनकाब, 11 गिरफ्तार
रायपुर से बड़ा साइबर अपराध रैकेट पकड़ाया है.

पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई. जानकारी के अनुसार, म्यूल अकाउंट से संबंधित साइबर अपराध में जब मोबाइल नंबरों की जांच की गई तो संबंधित सिम सेवा प्रदाता कंपनियों से तकनीकी डाटा प्राप्त कर इन सिमों की सच्चाई सामने आई. अपराध में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई, जिसमें चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं.

डी-केवाईसी के माध्यम से अतिरिक्त सिम एक्टिव करा लेते थे
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि नया सिम लेने या सिम पोर्ट कराने वाले ग्राहकों की ई-केवाईसी के दौरान डबल थंब स्कैन और आई ब्लिंक जैसे बायोमेट्रिक तरीकों का दुरुपयोग किया जाता था. वहीं, जिनके पास आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी होती थी, उनके विवरणों को खुद ही वेरिफाई कर डी-केवाईसी के माध्यम से अतिरिक्त सिम एक्टिव किए जाते थे. इन सिमों को फिर म्यूल अकाउंट से जुड़े ब्रोकर और संचालकों को बेचा जाता था.

 

11 आरोपियों को अरेस्‍ट किया, अब पूछताछ में उगलेंगे राज
इस मामले में पहले से कई ब्रोकर और रैकेट संचालक गिरफ्तार किए जा चुके हैं. अब गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में नितेश शर्मा (राजस्थान), पीयूष पांडे (मध्यप्रदेश), हरविंदर भाटिया, दिलावर सिंह संधू, वैभव साहू (दुर्ग), उदय राम यदु, आशीष कलवानी, चंदन कुमार सिंह, सचिन गिरी, अतहर नवाज (रायपुर) और सूरज मारकण्डे (धमतरी) शामिल हैं. फिलहाल पुलिस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है और यह जांच साइबर अपराध की नई परतों को उजागर कर रही है.