शराब के नशे में कलयुगी पिता ने अपने ही 3 साल के मासूम बेटे का किया टंगिया मारकर हत्या
शराब के नशे में कलयुगी पिता ने अपने ही 3 साल के मासूम बेटे का किया टंगिया मारकर हत्या
धमतरी। धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक के दुगली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम आमदी में दिल दहला देने वाली एक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक शराबी पिता ने नशे की हालत में अपने ही तीन साल के मासूम बेटे की टंगिया से बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना 18 मई की रात की बताई जा रही है, जिसकी जानकारी 19 मई सुबह आसपास के लोगों को मिली। मृतक बच्चे की पहचान शौर्य मरकाम के रूप में हुई है।
घटना का विवरण:
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी संजय मरकाम (उम्र लगभग 30 वर्ष) लंबे समय से शराब की लत से पीड़ित था। वह अक्सर घर में शराब पीकर झगड़ा करता था। घटना वाली रात भी वह शराब के नशे में धुत था और परिजनों से शराब के लिए पैसे मांग रहा था। पैसे नहीं मिलने पर वह हिंसक हो गया और गुस्से में आकर अपने ही बेटे शौर्य पर धारदार टंगिया से हमला कर दिया।
इस हमले में बच्चा बुरी तरह लहूलुहान हो गया। परिजनों ने आनन-फानन में उसे नरहरपुर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आरोपी फरार होकर पकड़ा गया
वारदात के बाद आरोपी संजय मौके से फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
क्षेत्र में सनसनी, परिवार सदमे में
इस क्रूर घटना से ग्राम आमदी समेत आसपास के क्षेत्रों में गहरा शोक और आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों ने बताया कि संजय की शराब की लत के चलते पहले भी कई बार घर में विवाद हुआ था, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि वह इस हद तक जा सकता है। मासूम शौर्य की मौत से पूरा गांव स्तब्ध है, वहीं परिवार मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है।
बच्चों के खिलाफ हिंसा – एक चिंताजनक प्रवृत्ति
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार:
2022 में भारत में बच्चों के खिलाफ कुल अपराधों की संख्या: 1,62,000 से अधिक
छत्तीसगढ़ में बच्चों के खिलाफ अपराध: लगभग 3,400 मामले, जिनमें से 12% से अधिक मामलों में परिजन ही आरोपी पाए गए
इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि नशे की लत कैसे इंसान को हैवान बना सकती है, और किस तरह मासूमों की जान परिवार के भीतर ही खतरे में पड़ जाती है।





