नवलदास उवाच – संस्कृति विभाग में बंदरबांट की स्थिति निर्मित छत्तीसगढ़ के प्रतिभासंपन्न कलाकारों को किया जा रहा अनदेखा

 नवलदास उवाच – संस्कृति विभाग में बंदरबांट की स्थिति निर्मित    छत्तीसगढ़ के प्रतिभासंपन्न कलाकारों को किया जा रहा अनदेखा

निखिल कुमार पाठक

 

विभाग में पदस्थ अधिकारी अपने लोगों को कर रहें लाभान्वित

भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ अंचल की लोककला, लोक-संस्कृति को स्थापित करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले नवलदास मानिकपुरी व अनुसुइया मानिकपुरी दंपति की संस्था मोर गवांई गांव संस्कृति विभाग में पदस्थ अधिकारी व कर्मचारियों की उपेक्षा का शिकार होने के लिए बाध्य है। लोककलाकार नवलदास मानिकपुरी ने कहा कि मैनपुर, शिवरीनारायण सहित विभिन्न आयोजनों में कुछ खास लोगों को ही बारंबार प्रस्तुतिकरण का अवसर प्रदान किया जाता है। वहीं पिछले पांच दशकों से कलाजीवी परिवार को अवसर प्रदान करने के प्रति उदासीन रहते हैं।

उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृति विभाग में कुछ खास लोगों को ही विभिन्न आयोजनों में सदैव कार्यक्रम प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाना साबित करता है कि वहां पदस्थ अधिकारी व कर्मचारी अपने खास लोगों को ही हर आयोजनों में प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाना साबित करता है कि वहां बंदरबांट की स्थिति निर्मित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लोक कला की पिछले पांच दशकों से उनकी पार्टी के चालीस कलाकारों को उपेक्षित करना संदेहास्पद स्थिति को स्वमेव बखान करते हुए महसूसा जा सकता है।श्री मानिकपुरी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि काफी मिन्नतें करने के बाद संस्कृति विभाग से पंजीकरण किया गया। उसके बाद भी राजिम, सिरपुर महोत्सव में या अन्य महोत्सव में अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने इसे दुर्भाग्य पूर्ण बताते हुए कहा कि यह बड़े ही दुख की बात हैं हमारे साथ संस्कृति विभाग हमेशा से भेदभाव करता रहा है। मानिकपुरी दंपति ने कहा कि देश के विभिन्न आयोजनों में भी हिस्सा न दिया जाना समझ से परे है।