छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघ का तांडव: इंसानी बस्ती में घुसा टाइगर, जान बचाने पेड़ पर चढ़े ग्रामीण
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघ का तांडव: इंसानी बस्ती में घुसा टाइगर, जान बचाने पेड़ पर चढ़े ग्रामीण
औंधी/मोहला-मानपुर:छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से सटे मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र के औंधी इलाके में बाघ की दहशत एक बार फिर चरम पर है। बीते 12 फरवरी से सक्रिय इस बाघ ने एक महीने के भीतर एक ग्रामीण और दो मवेशियों को अपना शिकार बनाया है। ताजा घटनाक्रम में बाघ ने बागडोंगरी और मरकाटोला क्षेत्र में दिन-दहाड़े हमला कर ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है।
खेत में बैल पर हमला, लहूलुहान होकर घर लौटा मवेशी
6 मार्च को बागडोंगरी ग्राम पंचायत में बाघ ने चर रहे एक बैल पर जानलेवा हमला कर दिया। खुशकिस्मती से बैल बाघ के चंगुल से छूटकर भागने में सफल रहा। जब लहूलुहान बैल अपने मालिक के घर पहुँचा, तो उसकी गर्दन और शरीर पर बाघ के दांतों और पंजों के गहरे निशान मिले, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।
पेड़ पर चढ़कर बचाई जान, रात भर नीचे मंडराता रहा बाघ
सबसे खौफनाक मंजर 6 और 7 मार्च की दरमियानी रात मरकाटोला मोहल्ले में देखने को मिला। यहाँ खेत में भुट्टे की फसल की रखवाली कर रहे दो ग्रामीणों का सामना अचानक बाघ से हो गया। बाघ ने उन्हें देखते ही दौड़ाया, जिसके बाद अपनी जान बचाने के लिए दोनों ग्रामीण आनन-फानन में पास के एक पेड़ पर चढ़ गए।
बाघ हार मानने को तैयार नहीं था और काफी देर तक उसी पेड़ के नीचे मंडराता रहा। ग्रामीणों की चीख-पुकार और जानकारी मिलने पर गाँव वाले बड़ी संख्या में टॉर्च लेकर मौके पर पहुँचे। ग्रामीणों के शोर और रोशनी को देखकर बाघ अंततः जंगल की ओर भाग निकला, तब जाकर पेड़ पर फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित नीचे उतारा जा सका।
दहशत के साये में ग्रामीण
बाघ की लगातार मौजूदगी और मवेशियों पर हमलों से पूरे क्षेत्र में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द से जल्द बाघ को पकड़ने या क्षेत्र से दूर खदेड़ने की मांग की है ताकि वे अपने खेतों और घरों में सुरक्षित रह सकें।












