छत्तीसगढ़: धान खरीदी के अंतिम दौर में व्यवस्थाएं बेपटरी, भौतिक सत्यापन के नाम पर किसानों की बढ़ी मुश्किलें
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़: धान खरीदी के अंतिम दौर में व्यवस्थाएं बेपटरी, भौतिक सत्यापन के नाम पर किसानों की बढ़ी मुश्किलें
रायपुर: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी अपने अंतिम चरण में है, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते किसानों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है।
प्रदेश के कई खरीदी केंद्रों में धान का उठाव न होने से जगह नहीं बची है, जिसके कारण समितियों ने नए टोकन जारी करना बंद कर दिया है। प्रशासन द्वारा अंतिम समय में थोपे गए ‘भौतिक सत्यापन’ के नियम ने आग में घी डालने का काम किया है।
जांच के चक्रव्यूह में उलझा किसान
धान बेचने आए किसानों का आरोप है कि वे पहले ही गिरदावरी, पटवारी जांच, एग्री-स्टेक पोर्टल पंजीयन और ऑनलाइन प्रक्रिया जैसी जटिल जांचों से गुजर चुके हैं। इसके बावजूद अब समिति प्रबंधक और कृषि विस्तार अधिकारी कोठारों में जाकर फिर से भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह प्रक्रिया केवल टोकन जारी करने में देरी करने और उन्हें परेशान करने के लिए अपनाई जा रही है।
रायपुर की खौनी समिति में बुधवार को जब अधिकारी सत्यापन के लिए पहुंचे, तो उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वहीं, कोण्डागांव जिले में धान खरीदी बंद होने से नाराज किसानों ने हाईवे पर तीन किलोमीटर लंबा चक्काजाम कर अपना विरोध दर्ज कराया।
खराब होने की कगार पर धान
31 जनवरी की अंतिम समयसीमा नजदीक होने के कारण किसानों में डर है कि यदि जल्द टोकन नहीं कटे, तो उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी। केंद्रों में जाम की स्थिति और बार-बार की जांच के कारण कई किसान खुले आसमान के नीचे अपना धान रखने को मजबूर हैं, जिससे फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
अधिकारियों का दावा: जारी रहेगी खरीदी
इस पूरे विवाद पर छत्तीसगढ़ कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के एमडी जितेंद्र शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी की प्रक्रिया 31 जनवरी तक निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “सभी पात्र किसानों से धान खरीदा जाएगा। सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निगरानी बढ़ाएं और खरीदी प्रक्रिया को सामान्य करें।”
मुख्य बिंदु:
अंतिम तिथि: 31 जनवरी 2026 तक होगी खरीदी।
केंद्रों की संख्या: प्रदेश के 2,740 केंद्रों पर चल रही है प्रक्रिया।
पंजीकृत किसान: 22 लाख से अधिक किसानों का हुआ है पंजीयन।
मुख्य समस्या: धान का उठाव न होना और भौतिक सत्यापन से उपजा विवाद।
राज्य सरकार जहां डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता का दावा कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर टोकन की किल्लत और समितियों की कार्यप्रणाली ने सरकार के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।











