छत्तीसगढ़ में ‘छेरछेरा’ की धूम: ‘माई कोठी के धान ला हेरते हेर’ के जयकारों के साथ दान-पुण्य का महापर्व आज
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ में ‘छेरछेरा’ की धूम: ‘माई कोठी के धान ला हेरते हेर’ के जयकारों के साथ दान-पुण्य का महापर्व आज
रायपुर, 3 जनवरी 2026:छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक पर्वों में विशेष स्थान रखने वाला ‘छेरछेरा’ त्यौहार आज पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पौष मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व ‘दान’ की महिमा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
अन्न दान की अनूठी परंपरा
आज सुबह से ही प्रदेश के गांवों और शहरों में बच्चों और युवाओं की टोलियां हाथ में झोला और टोकरी लेकर घर-घर पहुंच रही हैं। “छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरते हेर” की गूंज के साथ लोग नए फसल के धान का दान कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन दान करने से घर में अन्न और धन के भंडार साल भर भरे रहते हैं।
कृषि संस्कृति का प्रतिबिंब
यह पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित संस्कृति को दर्शाता है। फसल कटाई के बाद जब खलिहान से धान घर आ जाता है, तब किसान अपनी खुशी साझा करने के लिए यह पर्व मनाते हैं। इस दिन विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी व्यंजन जैसे चीला, फरा और चौसेला बनाए जाते हैं।
सामाजिक सद्भाव का संदेश
छेरछेरा केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने का माध्यम है। इस दिन हर वर्ग के लोग एक-दूसरे के घर जाकर अन्न मांगते हैं, जो अहंकार को त्यागने और उदारता अपनाने का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने भी इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का आह्वान किया है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
शाम के समय कई स्थानों पर ‘डंडा नृत्य’ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे पूरा प्रदेश उत्सव के माहौल में डूबा हुआ है।










