UAPA लगाने पर छत्तीसगढ़ पुलिस को कड़ी फटकार, सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी को जमानत दी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी
नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में एक आदमी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज कर लिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने अंतरिम जमानत आदेश को विफल करने के इरादे से यूएपीए का आरोप जोड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ पुलिस को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। इससे पहले कोर्ट ने हत्या के एक मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि पुलिस ने 2 जनवरी के अंतरिम जमानत आदेश को विफल करने के इरादे से यूएपीए का आरोप जोड़ा है। उसके बाद कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।
पीठ ने कहा कि यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता को केवल 2 जनवरी के आदेश को विफल करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। अपीलकर्ता उक्त मामले में जमानत पाने का हकदार है। अपील स्वीकार की जाती है और उसे जमानत पर रिहा किया जाएगा। पीठ ने आगे कहा कि अपीलकर्ता के खिलाफ पुलिस द्वारा जल्दबाजी में की गई कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि उसे हिरासत में लिया जाए और 2 जनवरी के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया जाए।
पीठ ने इसे घोर अनुचित करार देते हुए पुलिस अधिकारी के आचरण की निंदा की और उसे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के लिए अवमानना की चेतावनी दी। अदालत ने छत्तीसगढ़ की ओर से पेश हुए वकील से पीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारी द्वारा घोर अनुचित किया गया है। हम कोर्ट की आपराधिक अवमानना के लिए कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे। उसे इस कोर्ट के आदेशों की जानकारी थी।
वकील ने कहा कि आरोपी पहले भी जमानत पर छूट चुका है और उसके पास यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री है कि वह नक्सली गतिविधियों में शामिल था। हालांकि, अदालत ने अंतरिम संरक्षण के अपने आदेश को पूर्ण बना दिया और आरोपी को जमानत दे दी।
सुप्रीम कोर्ट मनीष राठौर की अपील पर सुनवाई कर रही थी। वह एक समाचार एजेंसी के लिए कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें हत्या के एक मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, क्योंकि जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री से पता चलता है कि वह हत्या में शामिल थे और उनका आपराधिक रिकॉर्ड था।





