बस्तर की महिलाओं ने बिखेरे प्रकृति के रंग: पालक, चुकंदर और पलाश से तैयार किया हर्बल गुलाल
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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बस्तर की महिलाओं ने बिखेरे प्रकृति के रंग: पालक, चुकंदर और पलाश से तैयार किया हर्बल गुलाल
बस्तर: इस होली बाज़ार में रासायनिक रंगों के बजाय बस्तर की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार प्राकृतिक रंगों की धूम है। ‘बिहान’ योजना से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने पालक, लाल भाजी, चुकंदर और पलाश के फूलों का उपयोग कर ऐसा हर्बल गुलाल तैयार किया है, जो न केवल सेहत के लिए सुरक्षित है, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई इबारत भी लिख रहा है।
प्रशिक्षण से मिला हुनर
क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र में मिले विशेष प्रशिक्षण के बाद आड़ावाल, लोहंडीगुड़ा, तोकापाल, दरभा, बास्तानार और बकावंड जैसे क्षेत्रों की महिलाओं ने इसका उत्पादन शुरू किया। इन रंगों को बनाने के लिए ‘कॉर्न फ्लावर’ (मक्के का आटा) को आधार बनाया गया है, जिसमें हल्दी, चंदन और सिंदूर जैसे प्राकृतिक तत्व मिलाए गए हैं।
प्राकृतिक गुणों का रखा गया ध्यान
गुलाल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पत्तियों और फूलों को सीधी धूप के बजाय छाया में सुखाया गया, जिससे उनके औषधीय गुण और प्राकृतिक रंग सुरक्षित रहें। इस पहल में मां दंतेश्वरी, सरस्वती, गौरी, बजरंग और मुस्कान जैसे कई महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
रायपुर तक पहुँची बस्तर की महक
यह हर्बल गुलाल अब स्थानीय बाजारों तक ही सीमित नहीं है। जगदलपुर के सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ इसे रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विक्रय केंद्रों पर भी उपलब्ध कराया गया है।
सेहत और स्वरोजगार का संगम
महिलाओं का कहना है कि बाज़ार के केमिकल युक्त रंगों से होने वाली त्वचा संबंधी बीमारियों और एलर्जी को देखते हुए उन्होंने यह सुरक्षित विकल्प पेश किया है। जिला प्रशासन के अनुसार, इस पहल से जहाँ एक ओर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।





