दुर्ग सेंट्रल जेल के राउंड-अप ऑफिसर को हटाया गया:उपेंद्र सिंह कबरा समेत 2 अपराधियों का जेल ट्रांसफर, दुर्ग पुलिस के रेड के बाद कि गई कार्यवाही

 दुर्ग सेंट्रल जेल के राउंड-अप ऑफिसर को हटाया गया:उपेंद्र सिंह कबरा समेत 2 अपराधियों का जेल ट्रांसफर, दुर्ग पुलिस के रेड के बाद कि गई कार्यवाही

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी

 

 

दुर्ग,,,दुर्ग केंद्रीय जेल में छापा पड़ने के बाद शुक्रवार को राउंड अप ऑफिसर अशोक साव को हटा दिया गया है। वहीं कुख्यात अपराधी उपेंद्र सिंह उर्फ कबरा समेत दो को जेल ट्रांसफर भी किया गया है। बता दें कि छापामार कार्रवाई में पुलिस ने मोबाइल फोन और तंबाकू, गांजा समेत आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की थी।

 

 

 

जेल अधीक्षक मनीष सांभरकर ने बताया कि राउंड अप ऑफिसर अशोक साव को राउंड अप से हटाकर जेजे शाखा में शिफ्ट किया गया है। कुख्यात उपेंद्र सिंह और चक्कर इंचार्ज कैदी रिंकू पांडे के जेल ट्रांसफर को उन्होंने रूटीन बताया है।

गौरतलब है कि बुधवार को तड़के 4.45 बजे कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी, एसपी जितेंद्र शुक्ला समेत सवा सौ पुलिस कर्मियों की टीम ने जेल में दबिश दी थी। इस दौरान टीम को पूरे जेल की तलाशी के बाद कुछ मात्रा में तंबाकू, गांजा, बीड़ी और चिलम मिला था। पुलिस ने इसका जब्ती पंचनामा भी पदमनाभपुर में करवाया था।

दुर्ग जेल की सेल में बंद कुख्यात अपराधी उपेंद्र सिंह को बिलासपुर और जेल का चक्कर इंचार्ज कैदी रिंकू पांडे को अंबिकापुर जेल भेज दिया है। दोनों कैदियों के जेल ट्रांसफर को लेकर मुख्यालय से आदेश आया था। वहीं तपन सरकार के जेल ट्रांसफर के लिए भी कोर्ट में आवेदन लगाया गया है।

 

ट्रेन हाईजैक कर उपेंद्र को छुड़ा ले गए थे बदमाश

 

पूरा मामला साल 2013 का है। उपेंद्र सिंह किसी मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जेल में बंद था। दुर्ग में भी अपहरण का एक मामला था। जिसकी आखिरी पेशी के दौरान वापस जाते वक्त 6 फरवरी 2013 को बदमाशों ने करीब डेढ़ किलोमीटर तक जनशताब्दी ट्रेन के ड्राइवर और अन्य स्टॉफ को गिरोह ने बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया था।

फिर उपेंद्र सिंह को उसके बेटे के साथ आए साथी छुड़ा ले गए। घटना के डेढ़ महीने बाद उसे झारखंड से गिरफ्तार किया था। ट्रेन हाईजैक करने और रेलकर्मियों के अपहरण की साजिश रचने के जुर्म में अप्रैल 2018 में उपेंद्र सिंह उर्फ कबरा को रेलवे एक्ट की पांच धाराओं के तहत सजा सुनाई थी।

 

इसके अलावा प्रीतम सिंह उर्फ राजेश, शंकर साव, अनिल सिंह, राजकुमार कश्यप, पिंकू उर्फ वरुण, सुरेश उर्फ पप्पू, उपेंद्र उर्फ छोटू को भी रेलवे एक्ट की पांच धाराओं के तहत सजा सुनाई थी। लेकिन उपेंद्र सिंह को छोड़कर बाकी की जमानत हो गई थी। उपेंद्र दुर्ग जेल में ही था।

 

बच्ची से हैवानियत फिर हत्या का अपराधी है रिंकू

 

रिंकू उर्फ ओमप्रकाश पांडेय गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में जेल में सजा काट रहा है। इसे कुछ साल पहले ही चक्कर इंचार्ज कैदी बनाया गया। रिंकू का मामला 7 मई 2004 का है। भिलाई-तीन विद्युत नगर में अपने घर के पास 7 साल की बच्ची को बहला फुसला कर अपने साथ ले गए। कोल्ड ड्रिंक में नशे की दवा मिलाकर पहले उसे पिलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया था।

 

असफल होने पर ब्लेड का उपयोग किया था। वारादात के बाद आरोपियों ने मासूम की हत्या कर शव को गटर में छुपा दिया। पुलिस ने मामले में 5 लोगों को आरोपी बनाकर कोर्ट में चालान पेश किया था। इसमें रिंकू उर्फ ओम प्रकाश और पप्पू उर्फ जसवंत को मई 2007 में आजीवन कारावास की सजा मिली। तब से वह दुर्ग जेल में निरुद्ध था।