मरीजों से अच्छे व्यवहार के लिए नर्सिंग स्टाफ होगा ट्रेनिंग
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी
वैसे तो नर्सिग की पढ़ाई के समय ही व्यवहार भी सिखाया जाता है, लेकिन डयूटी के समय कर्मचारी शायद इसे भूल जाते हैं।
बिलासपुर। अक्सर मरीज व स्वजन की शिकायत रहती है कि नर्सें करती हैं दुर्व्यवहार व्यवस्था सही करने बारी-बारी से दिया जाएगा प्रशिक्षण मरीजों से कैसे पेश आएं, इसे लेकर सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) की नर्सिग स्टाफ को ट्रेड किया जाएगा। जल्द ही इसके लिए ट्रेनिंग कैंप लगेंगे। प्रबंधन का मकसद है कि पीड़ा लेकर अस्पताल में आने वाले मरीजों को यहां पर रूखा व्यवहार न झेलना पड़े। वैसे तो नर्सिग की पढ़ाई के समय ही व्यवहार भी सिखाया जाता है, लेकिन डयूटी के समय कर्मचारी शायद इसे भूल जाते हैं।
ऐसे में अक्सर सभी अस्पताल से यह बात सुनने को मिलती है कि यहां नर्सिंग स्टाफ सही से पेश नहीं आते हैं। अक्सर तिरछे मुंह बात करते हुए नजर आते हैं। जबकि मरीज व उनके स्वजन पहले से ही परेशान रहते हैं। ऐसे में उन्हें किसी की खरी-खोटी सुनना पड़े तो उनकी दिक्कतें और भी बढ़ जाती हैं। ऐसा नहीं है कि प्रबंधन यह नहीं जानता है, इसी वजह से नर्सिंग स्टाफ के साथ अन्य कर्मियों को समय-समय पर निर्देश दिए जाते हैं कि वे मरीज व उनके स्वजन से अच्छा व्यवहार करें, लेकिन इसका असर कुछ ही दिन रहता है। इसके बाद स्थिति जस की तस की रहती है। वहीं अब इस स्थिति को बदलने के लिए ही विशेष प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया है। इसमें ट्रेनिंग कैंप के जरिए नर्सिंग से जुड़े सभी कर्मचारियों को यह पाठ पुन: पढ़ाया जाएगा।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल में बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले लोग न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान होते हैं। ऐसे में यदि उनके साथ तीखा व्यवहार होगा तो उनकी शारीरिक पीड़ा भी आसानी से दूर नहीं हो सकती। उनकी मानसिक परेशानी बढ़ेगी तो स्वाभाविक रूप से उनकी बीमारी भी बढ़ेगी। इसलिए यह जरूरी है कि मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार हो। इससे उनकी आधी तकलीफ तो अपने आप ही दूर हो जाएगी।
स्टाफ को सिखाई जाएंगी व्यवहार की बारीकियां
किसी भी अस्पताल में नर्सिग स्टाफ ही मरीज के ज्यादा नजदीक होता है। सर्जरी और प्राथमिक चेकअप को छोड़कर बाकी का लगभग पूरा इलाज नर्सिंग स्टाफ के ही जरिए होता है। देखभाल का जिम्मा भी इसी स्टाफ का होता है। जाहिर है कि ऐसे में नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार मरीजों को ज्यादा प्रभावित करता है। इसलिए उन्हें अब व्यवहार की बारीकियां सिखाई जाएंगी। यदि स्टाफ ट्रेड होगा तो वह मरीजों को राहत जल्द दे सकेगा।
रोजाना आते हैं एक हजार मरीज
सिम्स में रोजाना लगभग एक हजार से 1500 मरीजों का यहां पर आना होता है। ऐसे में मरीजों से कैसे पेश आना है, यह पहली जरूरत है। इसलिए ही विभाग ने अब स्टाफ को ट्रेंड करने की योजना बनाया है।





