खाकी पर दाग: जांच के दौरान सोना हड़पने वाली बर्खास्त हेड कॉन्स्टेबल गिरफ्तार, अब जेल में ही होगा नवजात का पालन-पोषण
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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खाकी पर दाग: जांच के दौरान सोना हड़पने वाली बर्खास्त हेड कॉन्स्टेबल गिरफ्तार, अब जेल में ही होगा नवजात का पालन-पोषण
दुर्ग।छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ‘रक्षक ही भक्षक’ बनने का एक अनोखा और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। कर्तव्य के दौरान ईमानदारी की कसमें खाने वाली एक महिला हेड कॉन्स्टेबल की लालच ने आज एक नवजात मासूम को जन्म लेते ही जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला 4 जुलाई 2022 का है, जब दुर्ग के सिंधिया नगर निवासी सोनाली द्विवेदी के घर चोरी हुई थी। इस केस की जांच मोहन नगर थाने में तैनात तत्कालीन प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता को सौंपी गई थी। जांच के दौरान 30 जून 2023 को आरोपी पीतांबर राव को गिरफ्तार किया गया और उसके पास से 79 ग्राम (करीब 8 तोला) सोना बरामद हुआ। नियमों के मुताबिक यह सोना मालखाने में जमा होना था, लेकिन मोनिका ने इसे अपने पास रख लिया।
कोर्ट में खुली पोल
जब पीड़िता ने अपनी ज्वेलरी वापस पाने के लिए कोर्ट में आवेदन किया, तब खुलासा हुआ कि जब्त जेवर सरकारी रिकॉर्ड में जमा ही नहीं हैं। सीनियर अधिकारियों के आदेश के बावजूद मोनिका ने जेवर नहीं लौटाए। इसके बाद मार्च 2025 में मोनिका के खिलाफ अमानत में खयानत और साक्ष्य छुपाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे बर्खास्त कर दिया गया।
फरारी और गिरफ्तारी
गिरफ्तारी के डर से मोनिका लंबे समय से फरार चल रही थी। पुलिस ने आखिरकार 2 फरवरी 2026 को उसे खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल जांच में पता चला कि मोनिका 9 महीने की गर्भवती है। जेल प्रशासन ने उसे जेल में ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराईं।
जेल में मासूम का भविष्य
9 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर मोनिका को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 10 फरवरी 2026 को उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। नियमानुसार, अब इस नवजात को अपनी मां के साथ जेल में ही रहना होगा। मोनिका की जमानत याचिका पहले ही कोर्ट से खारिज हो चुकी है। मोनिका के दो अन्य बच्चे भी हैं, जो अब अपनी मां के बिना रहेंगे।
भिलाई नगर सीएसपी सत्य प्रकाश ने पुष्टि की है कि आरोपी महिला को कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया था और अब नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जा रही है। एक तरफ जहां पुलिस विभाग अपनी छवि सुधारने में जुटा है, वहीं मोनिका गुप्ता जैसे मामले खाकी पर गहरा दाग लगा रहे हैं।












