मानवता की मिसाल: दुर्ग जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल से महिला बंदी का सुरक्षित प्रसव, स्वस्थ बालक ने लिया जन्म
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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मानवता की मिसाल: दुर्ग जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल से महिला बंदी का सुरक्षित प्रसव, स्वस्थ बालक ने लिया जन्म
दुर्ग। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर एवं प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश (अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग) के मार्गदर्शन में मानवता और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। दुर्ग केंद्रीय जेल के महिला प्रकोष्ठ में हत्या के आरोप में निरुद्ध एक गर्भवती महिला बंदी के स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण मातृत्व के अधिकारों की रक्षा करते हुए, प्राधिकरण के प्रयासों से उसने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया है।
संवेदनशीलता के साथ त्वरित पहल
जैसे ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) दुर्ग को महिला बंदी के गर्भवती होने की सूचना मिली, सचिव के नेतृत्व में त्वरित कदम उठाए गए। प्राधिकरण ने अपराध की गंभीरता से परे हटकर, महिला के ‘मातृत्व अधिकार’ और ‘जीवन के अधिकार’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। प्रारंभिक अवस्था से ही महिला की विशेष देखभाल शुरू कर दी गई।
नियमित निगरानी और चिकित्सकीय देखभाल
प्राधिकरण की सतत निगरानी में महिला बंदी के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं:
- विशेषज्ञ परामर्श: विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा समय-समय पर नियमित जांच और स्वास्थ्य परीक्षण।
- दवाइयां एवं उपचार: गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सभी दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई गईं।
- पोषण का ध्यान: जेल प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर महिला को गर्भावस्था के अनुरूप विशेष पौष्टिक एवं संतुलित आहार प्रदान किया गया।
- मानसिक संबल: कानूनी कार्यवाही के बीच महिला के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उसे निरंतर परामर्श और ढांढस दिया गया।
31 दिसंबर को गूँजी किलकारी
इन अथक प्रयासों और जेल प्रशासन व मेडिकल टीम की सतर्कता का सुखद परिणाम 31 दिसंबर 2025 को सामने आया। महिला बंदी ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। प्रसव सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ और वर्तमान में माता तथा नवजात शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण
यह सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि न्याय व्यवस्था केवल दंड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक और मानवीय अधिकारों की रक्षक भी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग की यह पहल दर्शाती है कि जेल की सलाखों के पीछे भी मानवीय संवेदनाएं और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं।







