छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले दिखा बंद का असर, कोयला खदानों पर श्रमिक संगठनों की हड़ताल जारी
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ के कोरबा में कोयला खदानों पर श्रमिक संगठनों की हड़ताल शुरू हो गई है। श्रमिक संगठन श्रम कानून में बदलाव, बढ़ते निजीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
कोरबा ।केंद्रीय और क्षेत्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े कर्मचारी बुधवार को देशभर में हड़ताल कर रहे हैं। इससे बैंकिंग, डाक और अन्य सेवाएं बाधित हो सकती हैं। वे नए श्रम संहिता और निजीकरण के विरोध और न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये और पुरानी पेंशन योजना जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा में कोयला खदानों पर श्रमिक संगठनों की हड़ताल शुरू हो गई है।
श्रमिक संगठन श्रम कानून में बदलाव, बढ़ते निजीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। हड़ताल के चलते कोयला खदानों में कामकाज प्रभावित हुआ है, प्रथम पाली में ही हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारी जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।
एसईसीएल मानिकपुर में प्रदर्शन कर रहे जय मुखर्जी ने बताया कि एक दिवसीय हड़ताल है। केंद्र सरकार ने पहले किसान विरोधी नीति अपनाई, हम मजदूरों के श्रम नीति कानून को लेकर बदलाव किया जा रहा है। उनके हक को छीना जा रहा है। आज हम अन्य श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर सुबह से ही खदान बंद का लोगों से समर्थन मांग रहे हैं। मानिकपुर के इंटक सेक्रेटरी प्रमोद कुमार बनर्जी ने बताया कि हड़ताल को कर्मचारियों का समर्थन मिल रहा है।
सीटू नेता धीरज ने बताया बीएमसी के अलावा, एटक, इंटक, एचएमएस, सीटू के अलावा अलग-अलग छोटे-छोटे संगठन भी समर्थन में है। सुबह से ही हड़ताल सफल बनाने को लोगों का सहयोग मांगा जा रहा है। यही नहीं घर-घर जाकर उन्हें समझाया जा रहा है। बता दें कि जिले में एसईसीएल, कोरबा, कुमुण्डा, गेवरा दीपका माइंस में खदान बंद करने सुबह से ही सभी श्रमिक संगठन लगे हुए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं।






