ईवीएम को लेकर सियासत बैलेट से चुनाव कराने को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खोला मोर्चा
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी
कांग्रेस ने चलाया एक सीट पर 375 प्रत्याशी उतारने का अभियान
रायपुर। : लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) को लेकर कांग्रेस ने प्रश्न उठाना शुरू कर दिया है। तीन राज्यों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में करारी हार के बाद से कांग्रेस बैलेट पेपर से मतदान कराने की वकालत कर रही है।
अब छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अभियान छेड़ दिया है। वह एक सीट पर 375 उम्मीद्वार उतारने के लिए कार्यकर्ताओं से अपील कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि बैलेट पेपर से अगर चुनाव हुए तो हमारी जीत पक्की है। मामले में भाजपा ने चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए भूपेश के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत की है। भाजपा का कहना है कि भूपेश मतदाताओं को शंका में डाल रहे हैं।

भूपेश बघेल ने कहा कि चुनाव आयोग की वेबसाइट में देखने से पता चला कि अगर एक सीट पर 374 या 384 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हो तो उस सीट पर चुनाव बैलट पेपर से कराए जाएंगे। यह बात वह कार्यकर्ताओं का भी बता रहे हैं। बतादें कि पुरानी ईवीएम में एक साथ अधिकतम 384 और नई ईवीएम में नोटा समेत 374 प्रत्याशियों तक ही मतदान कराने की सुविधा है। हालांकि इसके बाद बैलेट पेपर से चुनाव कराने का ऐसा कोई नियम नहीं है, यह केवल तकनीकी दिक्कत है। मामले में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने भी मीडिया से चर्चा के साफ कह चुके हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं है लेकिन न्यू जेनरेशन की जो ईवीएम है, उसमें 374 तक बैलेट यूनिट्स लग सकते हैं। इससे ज्यादा अगर प्रत्याशी होते हैं तो फिर बैलेट पेपर से चुनाव होगा। ऐसे में दूसरा ईवीएम भी नहीं जोड़ा जा सकता है।

लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक प्रत्याशी
एक सीट पर प्रत्याशियों का रोचक तथ्य यह रहा है कि 1996 के लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश में में नलगोंडा से 480 सबसे अधिक प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। इसके लिए 50 पेज का बैलेट पेपर बनाया गया था। हालांकि उस समय ईवीएम की व्यवस्था नहीं थी।

तमिलनाडू के विधानसभा में 1033 उम्मीदवार
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 1996 में मोदकुरिची विधानसभा क्षेत्र से 1033 उम्मीदवार खड़े थे। ऐसे में चुनाव आयोग को चुनाव कराने को लेकर काफी माथापच्ची करनी पड़ी थी और आयोग को बैलेट पेपर की जगह पूरी बुकलेट छापनी पड़ी थी।
सबसे पहले केरल से हुई थी शुरुआत
भारत में ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल 1982 में केरल के 70-पारुर विधानसभा क्षेत्र में किया गया था जबकि 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद से भारत में प्रत्येक लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन द्वारा ही संपन्न होती है।
ईवीएम का इतिहास:
भारत में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का आविष्कार 1980 में “एम बी हनीफा” ने किया था जिसे उसने “इलेक्ट्रानिक संचालित मतगणना मशीन” के नाम से 15 अक्तूबर 1980 को पंजीकृत करवाया था। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 1989 में “इलेक्ट्रानिक्स कार्पाेरेशन आफ इंडिया लिमिटेड” के सहयोग से भारत में ईवीएम बनाने की शुरुआत की गई थी।
एक ईवीएम में अधिकतम इतने प्रत्याशी जोड़े जा सकेंगे
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक एक पुरानी ईवीएम में अधिकतम 3840 मतों को रिकार्ड किया जा सकता है और एक ईवीएम में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के नाम अंकित किए जा सकते हैं। हालांकि ऐसे ही एक ईवीएम में अन्य इकाइयों को जोड़कर नोटा समेत 384 प्रत्याशियों के नाम जोड़ सकते हैं। इसके बाद आयोग पर निर्भर करेगा कि वह चुनाव कैसे कराए। वहीं एक “मतदान इकाई” (बैलेट यूनिट) में केवल 16 प्रत्याशियों का नाम अंकित रहता है। बाकी प्रत्याशी के लिए अलग मतदान पत्र का इस्तेमाल होता है।
यह है कानून – ईवीएम और बैलेट को लेकर
जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 61 (क) में चुनाव आयोग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में बैलेट पेपर और ईवीएम से चुनाव करा सकता है।
अगर मतदाता में शंका है तो चुनाव बैलेट पेपर पर कर देना चाहिए। केवल 16 देशों में ही ईवीएम का इस्तेमाल हो रहा है। बाकी देशों में भी मतपत्र से ही चुनाव हो रहे हैं।
टीएस सिंहदेव, कांग्रेस नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
कांग्रेस को हारने का डर सता रहा है इसलिए वे बहाने खोज रहे हैं। जहां-जहां उनकी सरकारी बनी है वहां ईवीएम खराब नहीं थी। विजय शर्मा, भाजपा नेता व उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़





