छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट अपने हितों के लिए संगठन बनाना अधिकार

 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट अपने हितों के लिए संगठन बनाना अधिकार
  1. राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार चौधरी

 

 

अपने हितों के लिए संगठन बनाना अधिकार

फैसला: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, बर्खास्तगी संवैधानिक अधिकारों का है हनन

अपने हितों के लिए संगठन बनाना अधिकार

 

बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अपने हितों की रक्षा के लिए संगठन बनाना और गतिविधियों का संचालन करना संवैधानिक अधिकार है। इस आधार पर शासकीय कर्मचारियों को बर्खास्त करना संविधान प्रदत्त अधिकारों का हनन है। इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता होमगाडर्स की बहाली व लंबित देयक भुगतान करने के निर्देश राज्य शासन को दिए हैं।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने होमगार्ड्स को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अपने हितों के लिए संगठन बनाकर गतिविधि करने के आधार पर होमगार्ड्स को बर्खास्त नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता छह होमगार्ड्स को कोर्ट ने राहत देते हुए उनकी सेवा बहाल करने तथा लंबित देयकों का भुगतान करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। याचिकाकर्ता चित्रसेन, जगजीवन त्रिलोचन समेत अन्य चार लोग बतौर होमगार्ड नियुक्त थे। इन्होंने साल 2011 में अपने हितों के लिए एक एसोसिएशन होमगार्ड सैनिक एवं परिवार कल्याण संघ बनाया। जिसकी जानकारी होने पर आला अधिकारियों ने मार्च 2011 में इन्हें निलंबित करते हुए शोकाज नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद अप्रैल 2011 में सभी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

इस कार्रवाई के खिलाफ होमगाडर्स ने अधिवक्ता शिशिर दीक्षित के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें कहा कि सिर्फ एक संगठन बनाने के कारण इनको नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। मामले की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच में हुई। सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद माना कि एसोसिएशन बनाना याचिकाकर्ताओं का संवैधानिक अधिकार है। इस आधार पर कर्मचारियों को संविधान प्रदत्त अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इसे आधार बनाकर कर्मचारियों को निलंबित या बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने सेवा से बर्खास्त करने के राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ताओं को वापस बहाल करने और लंबित देयक के भुगतान का निर्देश दिया है।