हाईकोर्ट की सख्ती: जेलों में अब मॉडल मैनुअल 2016 के तहत मिलेंगी सुविधाएं, बेमेतरा में तैयार हुई ‘ओपन जेल’
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार
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हाईकोर्ट की सख्ती: जेलों में अब मॉडल मैनुअल 2016 के तहत मिलेंगी सुविधाएं, बेमेतरा में तैयार हुई ‘ओपन जेल’
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या और वहां व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नई जेलों का निर्माण ‘मॉडल जेल मैनुअल 2016’ के मानकों के अनुरूप ही किया जाए। मामले की अगली सुनवाई अब 5 मई को होगी।
सुनवाई के दौरान जेल महानिदेशक (DG) ने शपथपत्र के माध्यम से बताया कि बिलासपुर के बैमा नगई में नई जेल का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुसार, इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है। कोर्ट ने अब प्रदेश की सभी जेलों की वर्तमान क्षमता और वहां उपलब्ध जगह का पूरा ब्यौरा मांगा है।
क्या होती है ‘ओपन जेल’ (खुली जेल)?
बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली प्रदेश की नई ओपन जेल बनकर तैयार हो गई है। आम जनता के मन में अक्सर सवाल होता है कि यह सामान्य जेल से कैसे अलग है। आइए विस्तार से समझते हैं:
1. बिना सलाखों की जेल:
ओपन जेल में कैदियों को पारंपरिक जेलों की तरह कोठरियों या सलाखों के पीछे बंद करके नहीं रखा जाता। यहाँ सुरक्षा के घेरे न्यूनतम होते हैं और कैदी एक निर्धारित परिसर के भीतर स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।
2. परिवार के साथ रहने की सुविधा:
ओपन जेल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ अच्छे आचरण वाले कैदियों को अपने परिवार (पत्नी और बच्चों) के साथ रहने की अनुमति दी जाती है। सरकार उन्हें रहने के लिए छोटे आवास उपलब्ध कराती है।
3. रोजगार और आत्मनिर्भरता:
यहाँ कैदी जेल परिसर के बाहर या भीतर खेती, मजदूरी या अन्य तकनीकी कार्य कर सकते हैं। वे दिन भर काम करके पैसे कमा सकते हैं और शाम को वापस जेल परिसर में अपनी हाजिरी देते हैं। इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद मिलती है।
4. किसे मिलता है यहाँ रहने का मौका?
ओपन जेल में हर कैदी को नहीं रखा जाता। सामान्यतः ऐसे कैदी जिन्होंने अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा (अक्सर 5 से 10 साल) काट लिया हो और जिनका जेल में आचरण बहुत अच्छा रहा हो, उन्हें ही यहाँ शिफ्ट किया जाता है। गंभीर अपराधों (जैसे आतंकी गतिविधियों) के दोषियों को यहाँ नहीं रखा जाता।
5. उद्देश्य – सुधार और पुनर्वास:
इसका मुख्य उद्देश्य कैदियों को अपराधी के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना है। यह व्यवस्था सजा के बजाय ‘सुधार’ पर केंद्रित है, ताकि रिहाई के बाद कैदी को समाज में तालमेल बिठाने में दिक्कत न हो।
अगली कार्रवाई:
हाईकोर्ट ने डीजी जेल को निर्देश दिया है कि वे 11 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या कैदियों को मैनुअल के हिसाब से पर्याप्त जगह और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।





