अलविदा ‘साहित्यकार पुलिस कप्तान’: छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन ने दुनिया को कहा अलविदा, मेदांता में ली अंतिम सांस।

 अलविदा ‘साहित्यकार पुलिस कप्तान’: छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन ने दुनिया को कहा अलविदा, मेदांता में ली अंतिम सांस।

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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अलविदा ‘साहित्यकार पुलिस कप्तान’: छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन ने दुनिया को कहा अलविदा, मेदांता में ली अंतिम सांस।

 

 

रायपुर/पटना: छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और प्रखर बुद्धिजीवी विश्वरंजन का शनिवार रात पटना के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और हृदय संबंधी समस्याओं के कारण पिछले माह से अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस गलियारों सहित साहित्यिक जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है।

पुलिसिंग और साहित्य का संगम थे विश्वरंजन

1973 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के छठवें डीजीपी थे। उन्हें केवल एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रखर कवि, लेखक और आलोचक के रूप में भी जाना जाता था। साल 2007 में तत्कालीन ओपी राठौर के असामयिक निधन के बाद रमन सिंह सरकार ने उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस की कमान सौंपी थी।

आईबी में लंबा अनुभव और ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ का दौर

छत्तीसगढ़ का डीजीपी बनने से पहले विश्वरंजन ने अपने करियर का एक लंबा हिस्सा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में बिताया था। वे एडिशनल डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे थे। जुलाई 2007 में जब वे छत्तीसगढ़ के पुलिस प्रमुख बने, तब प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ कड़े अभियानों (जैसे ऑपरेशन ग्रीन हंट) की शुरुआत और पुलिस आधुनिकीकरण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। वे लगभग चार साल तक इस पद पर काबिज रहे।

साहित्यिक विरासत

विश्वरंजन जी का लगाव पुलिस की वर्दी के साथ-साथ कलम से भी गहरा था। उनके निधन पर मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका जाना छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए एक ऐसी बौद्धिक क्षति है जिसकी भरपाई होना मुश्किल है।