कुंभकरण की ‘नातिन’ का कारनामा: घर के कामों से तौबा, अब शौचालय को ही बना लिया शयनकक्ष!

 कुंभकरण की ‘नातिन’ का कारनामा: घर के कामों से तौबा, अब शौचालय को ही बना लिया शयनकक्ष!

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कुंभकरण की ‘नातिन’ का कारनामा: घर के कामों से तौबा, अब शौचालय को ही बना लिया शयनकक्ष!

 

दुर्ग,आज के दौर में जहां दुनिया रफ़्तार से भाग रही है, वहीं नम्रता उर्फ ‘निम्मी’ (पिता मोहन कन्नौजे) ने आलस के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं। निम्मी की दिनचर्या देख मोहल्ले वाले भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं—न समय पर सोकर उठना, न घर के कामों में हाथ बंटाना। निम्मी पर ‘बिल्ली की गू’ वाला मुहावरा सटीक बैठता है, यानी वह किसी काम की नहीं, बस घर में एक जगह पड़ी रहने वाली मुसीबत बन गई है।

 

मम्मी के आंसू और खाने का स्वाद:

बेचारी मां सारिका की हालत तो और भी दयनीय है। बेटी के इस रवैये से तंग आकर वे अक्सर रोते हुए खाना खाने को मजबूर हैं। मां का कलेजा फटता है जब वह देखती हैं कि उनकी लाड़ली कामचोरी की सारी हदें पार कर चुकी है।

शौचालय बना ‘स्लीपिंग ज़ोन’:

हद तो तब हो गई जब आज निम्मी ने एक ऐसा ‘अजीबोगरीब’ कांड किया जिसे सुनकर लोग हंसे या रोएं, समझ नहीं पा रहे। मोहतरमा शौच करने गईं और वहां की शांति उन्हें ऐसी भायी कि वे शौचालय के भीतर ही गहरी नींद में सो गईं! घरवाले बाहर इंतज़ार करते रहे और निम्मी अंदर सपनों की दुनिया में सैर कर रही थीं।

निष्कर्ष:

निम्मी की इस ‘सोती हुई प्रतिभा’ ने आज पूरे घर को सोच में डाल दिया है। क्या निम्मी कभी इस आलस के चंगुल से बाहर निकलेंगी या फिर शौचालय जैसे स्थान ही उनके नए विश्राम गृह बने रहेंगे? यह तो वक्त ही बताएगा।