छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति पर सियासी संग्राम: होली पर खुलेगी ‘मधुशाला’, कांग्रेस नेता भरत बुंदेला बोले– “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार”

 छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति पर सियासी संग्राम: होली पर खुलेगी ‘मधुशाला’, कांग्रेस नेता भरत बुंदेला बोले– “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार”

राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक वीरेंद्र कुमार

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छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति पर सियासी संग्राम: होली पर खुलेगी ‘मधुशाला’, कांग्रेस नेता भरत बुंदेला बोले– “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार”

महासमुंद/छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए घोषित नई आबकारी नीति ने प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। महासमुंद के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत बुंदेला ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि होली जैसे पवित्र त्योहार पर शराब दुकानें खोलने का निर्णय लेकर राज्य सरकार प्रदेश की युवा पीढ़ी के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है।

क्या है नई आबकारी नीति और बदलाव?

छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग ने शराब बिक्री के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जो फरवरी 2026 से प्रभावी होने जा रहे हैं:

होली अब ‘ड्राई डे’ नहीं: नई नीति के तहत होली को आधिकारिक शुष्क दिवस (Dry Day) की सूची से हटा दिया गया है। अब होली के दिन भी शराब की दुकानें खुली रहेंगी।

ड्राई डे की संख्या में कटौती: साल भर में होने वाले 7 शुष्क दिवसों को घटाकर अब केवल 4 कर दिया गया है।

हटाए गए ड्राई डे: होली के साथ-साथ मुहर्रम और महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस (30 जनवरी) को भी ड्राई डे की सूची से बाहर कर दिया गया है।

अब केवल इन 4 दिनों पर रहेगी बंदी:

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)

गांधी जयंती (2 अक्टूबर)

गुरु घासीदास जयंती (18 दिसंबर)।

भरत बुंदेला के तीखे आरोप: “राजस्व के लिए परंपराओं से समझौता”

कांग्रेस नेता भरत बुंदेला ने कहा कि होली रंगों और भाईचारे का पावन पर्व है, जिसे लोग पारंपरिक रूप से ‘ठंडई’ के साथ मनाते आए हैं। उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए:

युवा पीढ़ी पर असर: त्योहार के दिन शराब की आसान उपलब्धता से युवा नशे की ओर आकर्षित होंगे, जिससे उनका भविष्य खराब होगा।

कानून व्यवस्था की चुनौती: होली पर शराब पीकर हुड़दंग और आपराधिक घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है, जिससे आम जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी।

सरकार की प्राथमिकता: उन्होंने आरोप लगाया कि विष्णुदेव साय सरकार को जनहित और संस्कारों से ज्यादा केवल शराब से मिलने वाले राजस्व की चिंता है।

सरकार का तर्क: अवैध बिक्री पर लगाम

दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों और अधिकारियों का मानना है कि ड्राई डे के दिन शराब दुकानों के बंद रहने से अवैध शराब की बिक्री और कालाबाजारी (Black Marketing) बढ़ जाती थी। सरकार का दावा है कि नियंत्रित बिक्री से अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी और सरकारी खजाने को भी मजबूती मिलेगी।

फिलहाल, इस नीतिगत बदलाव ने प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नई जंग छेड़ दी है, जिसमें ‘संस्कार बनाम राजस्व’ की बहस तेज हो गई है।