दुर्ग जिले के दंपति तलाक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला, एक ही छत के नीचे रहेंगे पति-पत्नी,
राज्य ब्यूरो मोहम्मद आसिफ खान संपादक बीरेंद्र कुमार
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी को ग्राउंड फ्लोर पर तो पति को फर्स्ट फ्लोर रहने का निर्देश दिया है, दोनों ने तलाक लेने का फैसला किया था, लेकिन कोर्ट में मामला जाने के बाद घर में रहने के लिए सहमति बन गई
बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के तलाक के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. दरअसल, फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट की पहल के बाद पति-पत्नी ने सुलह का रास्ता अपनाया है, उनके बीच 6 बिंदुओं पर सहमति बनी है. जिसके मुताबिक उन्हें घर के खर्च में बराबर का हिस्सा देना होगा और साथ में मिलकर खर्चा उठाना होगा, गवाहों की मौजूदगी में ये एग्रीमेंट हुआ है. जिसमें पति और पत्नी घर के किस फ्लोर पर रहेंगे इसको लेकर भी फैसला सुनाया गया है.
दुर्ग का है पूरा मामला
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा है कि ऐसा तलाक के आदेश को रद्द करने और विवाह में एकता और संबंधों में स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए किया गया है, दरअसल, दुर्ग निवासी महिला और उसके पति के बीच आपसी विवाद शुरू हो गया, जिसके चलते मामला फैमिली कोर्ट में पहुंच गया. फैमिली कोर्ट ने 9 मई 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के तहत पेश परिवाद को स्वीकार करते हुए तलाक की डिक्री मंजूर की थी. लेकिन फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में शुरू हो गई.
यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा था, हाईकोर्ट अपील की सुनवाई के दौरान ही पति-पत्नी ने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया. बीते 28 अप्रैल 2025 को गवाहों की उपस्थिति में एग्रीमेंट का दस्तावेज तैयार किया गया, इसे 1 मई 2025 को हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया. हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2025 के समझौते को दर्ज करते हुए अपील स्वीकार की है, जिसके बाद जिसके बाद फैमिली कोर्ट के 9 मई 2024 के आदेश और डिक्री को रद्द कर दी, साथ ही स्पष्ट किया कि पति-पत्नी को समझौते की शर्तों को मानना होगा, एग्रीमेंट तोड़ने पर दोनों में से कोई भी दोबारा कोर्ट आ सकते हैं. हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले ही पति-पत्नी ने आपस में सुलह का रास्ता अपनाया, जिसमें दोनों ने मिलकर कुछ शर्तें तय की है.
पति-पत्नी ने तय की शर्ते
पति-पत्नी के बीच जो शर्ते तय हुई हैं, इन शर्तों को हाईकोर्ट ने भी मान लिया है. समझौते के मुताबिक, भिलाई की जिस कॉलोनी में उनका मकान है, वहां दोनों साथ रहेंगे, पति ग्राउंड फ्लोर और पत्नी फर्स्ट फ्लोर पर रहेगी. दोनों मंजिलों पर अपने-अपने हिस्से की मरम्मत की जिम्मेदारी दोनों की होगी. जल कर, बिजली बिल, संपत्ति कर, रखरखाव शुल्क जैसे सभी सामान्य खर्च दोनों बराबर बांटेंगे. हर पक्ष अपने हिस्से का समय पर भुगतान करेगा और उसका रिकॉर्ड रखेगा. दोनों के व्यक्तिगत खर्च, बैंक खाते, पेंशन, वेतन और व्यक्तिगत आय से संबंधित जिम्मेदारी अपनी-अपनी होगी. कोई भी पक्ष दूसरे की वित्तीय संपत्ति में बिना लिखित सहमति के हस्तक्षेप नहीं करेगा, इसके अलावा अपने-अपने फ्लोर पर संशोधन या निर्माण कार्य कर सकेंगे, बशर्ते कि इससे दूसरे पक्ष की जगह या साझा हिस्सा प्रभावित न हो, ऐसे कार्य की सूचना 30 दिन पहले देनी होगी.
पत्नी को केंद्रीय हॉस्पिटल का चिकित्सा लाभ दिलाने के लिए पति जरूरी औपचारिकताएं पूरी करेगा. पत्नी आवेदन शुल्क और अन्य खर्च खुद वहन करेगी, दोनों को यात्रा, अलग स्थानों पर रहने और स्वतंत्र सामाजिक संबंध रखने की स्वतंत्रता होगी. कोई भी पक्ष दूसरे के रिश्तेदारों या सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं होगा. आपसी सहमति से संयुक्त यात्राएं कर सकेंगे. इन शर्तों की वजह से यह फैसला चर्चा में बना हुआ है.





